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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 243, कुल 788 में से

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पृष्ठ 243

में इन दोनों विषयों पर विचार करने का यत्न करना है ताकि आम जनता को इनकी
तह तक पहुँचने का अवसर मिले और यह पता चल सके कि सही मायनों में
षड्यन्त्र करने वाला और धर्मों का विरोधी कौन होता है और किस तरह दुनिया का
भला करने वालों को षड्यन्त्रकारी और अधर्मी कहा जाता है। वास्तव में
षड्यन्त्रकारी और अधर्मी तो ये स्वयं होते हैं।
गुप्त तख़्तापलट आन्दोलन
वर्तमान सरकार यह हल्ला करती नहीं थकती कि हिन्दुस्तान में गुप्त तख़्तापलट
आन्दोलन क़ायम है। इस आन्दोलन के अस्तित्व को प्रकट करने के लिए कहीं न
कहीं से टूटे-फूटे पिस्तौल और बम आदि अपने खुशामदियों के माध्यम से पकड़ने
का ढोंग रच लेती है और कहीं किसी अधिकारी पर कोई खाली जाने वाला हमला
ही करवाया जाता है और कभी रेलपटरी के पेंच ढीले किये जाते हैं, जबकि लाट
साहिब आदि को गुज़रना हो। यह सब ऐसी बातें हैं, जिन्हें गुप्त तख़्तापलट षड्यन्त्र
या आन्दोलन आमतौर पर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस समय यह सबकुछ पुलिस
की ओर से हो रहा है, जिसका सबूत इस बात से मिलता है कि बताये गये तख़्ता
पलटने वालों की इस कार्रवाई से नुक़सान कहाँ तक होता है? बंगाल को इस समय
सरकार इस आन्दोलन का घर बता रही है। पिछले कुछ सालों में चाहे बंगाल पुलिस
ने कितनी ही जगहों से टूटे-फूटे हथियार आदि पकड़े और कई बार सरकारी
अधिकारियों पर हमलों की साज़िश का अस्तित्व भी बताया, लेकिन आज तक वहाँ
किसी भी सरकारी अधिकारी की या कोई राजनीतिक मृत्यु नहीं हुई, जिससे यह
सिद्ध होता है कि यह सबकुछ पुलिस के आदमी ही करते हैं। यदि तख़्ता पलटने
वाले किसी सरकारी अधिकारी की जान लेने के लिए तैयार हो जायें तो क्या वे
उसे सूखा जाने देंगे? यदि तख़्ता पलटने वाले हथियार आदि रखें तो क्या इस तरह
के टूटे-फूटे ही रखें, जिनके बारे में बंगाल पुलिस भी अपनी गवाहियों में बता चुकी
है कि ये हथियार चलाने वालों के लिए ही ज़्यादा ख़तरनाक हैं और जिस पर चलाये
जाते हैं उसके लिए कम! यदि तख़्ता पलटने वाले गाड़ियाँ उलटने का यत्न करें
तो क्या इसमें सफल न हों? ये सब ऐसी बातें हैं जो सिद्ध करती हैं कि यह सबकुछ
आज़ादी के उपासकों को कुचलने के लिए पुलिस-कर्मचारियों की ओर से किया
जाता है।
हमें इस बात से इन्कार नहीं कि हिन्दुस्तान में तख़्ता पलटने का आन्दोलन है,
लेकिन हमारा कहना है कि इस समय जो हो रहा है वह पुलिस की ओर से है
और इतिहास बताता है कि जब भी कोई तख़्ता पलटने का काम शुरू करते हैं,
वे अपने वार कम ही खाली जाने देते हैं। और सरकार को भी यह निश्चय रखना
चाहिए कि ऐसे लोगों को (जिनका धर्म-ईमान ही देश की आज़ादी हो और जो
विविध सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न : कुशाग्र विश्लेषक दृष्टि / 237