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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 788 में से

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पृष्ठ 205

अराजकतावाद : एक
भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के अध्ययन के साथ-साथ भगतसिंह ने
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का भी पर्याप्त अध्ययन किया व उस पर मनन
किया। इसी सिलसिले में ‘किरती’ में ‘अराजकतावाद क्या है’ आदि लेख व कुछ
अनुवाद छपे थे। मई 1928 से ‘किरती’ में भगतसिंह ने अराजकतावाद पर यह
लेखमाला शुरू की, जो अगस्त तक चलती रही। – स.
संसार में आज बहुत हलचल मची है। जाने-माने विद्वान दुनिया में शान्ति-स्थापना
के कार्य में उलझे हैं लेकिन जिस शान्ति-स्थापना के प्रयास किये जा रहे हैं, वह
अस्थायी नहीं वरन स्थिर, हमेशा स्थापित रहने वाली शान्ति है। उस तक पहुँचने
के लिए बड़े-बड़े महापुरुष अपना जीवन अर्पित कर गये और कर रहे हैं। लेकिन
आज हम गुलाम हैं। हमारी निगाहें कमज़ोर हैं, हमारे दिमाग़ कुन्द हैं। हमारा मन
कमज़ोर होकर रो रहा है। हम दुनिया की शान्ति के लिए क्या चिन्ता करें, अपने
देश के लिए ही कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसे अपनी बदक़िस्मती ही कहें। हमें
तो अपने दकियानूसी विचार ही तबाह कर रहे हैं। हम भगवान और स्वर्ग पाने के
लिए आत्मा-परमात्मा के विलाप में फँसे हैं। यूरोप को हम तुरन्त ही भौतिकवादी
कह देते हैं। उनके जो विचार हैं, उनकी ओर ध्यान ही नहीं देते। हम आध्यात्मिक
रुझान वाले जो हैं! हम बड़े त्यागी जो हैं! हमें इस संसार की बातें ही नहीं करनी
चाहिए! हमारी ऐसी दुरावस्था हो गयी है कि रोने को मन करता है। बीसवीं सदी
में हालात सुधर रहे हैं। नौजवानों के सोच-विचार पर यूरोप के विचारों का
कुछ-कुछ असर पड़ रहा है। और जो नौजवान दुनिया में कुछ तरक्क़ी करना चाहते
हैं, उन्हें वर्तमान युग के महान तथा उच्च विचारों का अध्ययन करना चाहिए।
आज समाज में होने वाले दमन के विरुद्ध कौन-सी आवाज़ उठ रही है और
स्थायी शान्ति-स्थापना के लिए कैसे विचार उठ रहे हैं, उन्हें ठीक से समझे बिना
इन्सान का ज्ञान अधूरा रह जाता है। आज हम संक्षेप में साम्यवाद और समाजवाद आदि
अनेक विचारों के बारे में सुन रहे हैं। इन सबसे ऊँचा आदर्श अराजकतावाद ही समझा
जाता है। यह लेख उसी अराजकतावाद के सम्बन्ध में लिखा जा रहा है।
जनता ‘अराजकता’ शब्द से बहुत डरती है। जब कोई व्यक्ति अपनी स्वतन्त्रता
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 199