भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 201, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसच कहा है -
“सुधार बूढ़े आदमी नहीं कर सकते, क्योंकि वह बहुत ही बुद्धिमान और
समझदार होते हैं। सुधार तो होते हैं युवक के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा
से, जिन्हें भयभीत होना आता ही नहीं और जो विचार कम तथा अनुभव अधिक
करते हैं।”
ऐसा लगता है कि उस समय इस प्रान्त (पंजाब) के युवक इन भावनाओं से
प्रभावित होकर ही स्वतन्त्रता संघर्ष में कूद पड़ते थे। तीन मास पहले जहाँ बिल्कुल
ख़ामोशी थी, वहाँ अब स्वदेशी और स्वराज्य का आन्दोलन इतना बलशाली हो गया
कि नौकरशाही घबरा उठी। उधर लायलपुर इत्यादि ज़िलों में नये कलोनी एक्ट के
विरुद्ध आन्दोलन चल रहा था। वहाँ किसानों की हमदर्दी में रेलवे के मज़दूरों ने
भी हड़ताल की और उनकी सहायता के लिए धन भी एकत्रित किया जाने लगा।
इसका परिणाम यह हुआ कि अप्रैल के अन्त तक पंजाब सरकार घबरा गयी। पंजाब
के तत्कालीन गवर्नर ने भारत सरकार को अपने एक पत्र में यह सम्पूर्ण स्थिति बताते
हुए लिखा था - “प्रान्त के उत्तरी ज़िलों में केवल शिक्षित वर्ग, और उनमें भी
ख़ासकर वकील तथा विद्यार्थी तबके तक ही नये विचार सीमित हैं, किन्तु प्रान्त
के केन्द्र की ओर बढ़ते ही यह साफ़ नज़र आता है कि असन्तोष और अशान्ति
तेज़ी से बढ़ती जा रही है।” इसी पत्र में आगे चलकर उन्होंने लिखा था, “इन लोगों
को (आन्दोलन के नेताओं को) अमृतसर और फ़िरोज़पुर में विशेष रूप से सफलता
मिली है। रावलपिण्डी तथा लायलपुर की तरफ़ भी वे बेचैनी फैलाने में क़ामयाब
हो रहे हैं। लाहौर का तो कहना ही क्या है।” पत्र के अन्त में कहा गया है, “कुछ
नेता तो अंग्रेज़ों को देश से निकाल देने के मंसूबे बाँध रहे हैं। कम से कम वे हमें
शासन से हटा देने की चेष्टा में अवश्य हैं। वे या तो शक्ति के द्वारा ऐसा करना
चाहते हैं, या जनता और शासन के बीच असहयोग द्वारा! ऐसा वातावरण उत्पन्न
करने के लिए वे उत्तरदायित्वहीन ढंग से अंग्रेज़ों के प्रति घृणा तथा द्वेष उत्पन्न कर
देना चाहते हैं। वर्तमान स्थिति बहुत ही नाजुक है और शीघ्र ही हमें इसका कुछ
न कुछ प्रबन्ध करना चाहिए।”
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 195