भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 191, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंशहीद खुशीराम!
अक्टूबर, 1928 के 'किरती' में प्रकाशित। - स.
1919 का वर्ष भी हिन्दुस्तान के इतिहास में हमेशा ही याद रहेगा। ताज़ी-ताज़ी
लड़ाई ख़त्म हुई थी। हिन्दुस्तानियों और विशेषतः पंजाबियों ने प्राणों पर खेलकर
अंग्रेज़ों को जीत हासिल करवायी थी, लेकिन अहंकारी अंग्रेज़ों ने अहसान का ख़ूब
बदला चुकाया। रोल्ट एक्ट पास कर दिया। तूफ़ान मच गया। पंजाब में तो ख़ासतौर
पर जोश बढ़ गया। पंजाब में तो अभी पिछले युद्ध की याद ताज़ा थी, उन्हें रोल्ट
एक्ट देखकर हद दर्जे की हैरानी हुई। हड़तालें, जुलूस व मीटिंगें होने लगीं। जोश
बहुत बढ़ा। नौबत जलियाँवाला और मार्शल लॉ तक की आ गयी।
लोग डर गये। कौन कहता था कि निहत्थों पर भी गोली चलायी जा सकती
है। आम लोगों ने गिरते-पड़ते पीठ में ही गोलियाँ खायीं। लेकिन उनमें भी
श्री खुशीराम जी शहीद ने छाती पर गोलियाँ खा-खाकर क़दम आगे ही बढ़ाया और
बहादुरी की लाजवाब मिसाल क़ायम कर दी।
आपका जन्म 27 सावन, संवंत 1957 में गाँव सैदपुर, ज़िला झेलम में लाला
भगवानदास के घर हुआ था। आपकी जाति अरोड़ा थी। पैदा होने पर आपकी
जन्म-पत्री बनायी गयी और बताया गया कि यह बालक बड़ा बहादुर और तगड़ा
होगा और इसका नाम भी ख़ूब प्रसिद्ध होगा। इसलिए उस समय आपका नाम
श्री भीमसेन रखा गया, लेकिन बाद में आप श्री खुशीराम के नाम से ही प्रसिद्ध
हुए। आप अभी बहुत छोटे ही थे, जब आपके पिता का देहान्त हो गया। आपका
ख़ानदान बहुत ग़रीब था और आपका पालन-पोषण लाहौर नवाँकोट अनाथालय में
हुआ था। वहीं पहले-पहल आपकी शिक्षा शुरू हुई। वक़्त गुज़रता चला गया। आप
फिर डी.ए.वी. कॉलेज, लाहौर में पढ़ने लगे। 1919 में 19 वर्ष की आयु में आपने
पंजाब विश्वविद्यालय से शास्त्री की परीक्षा दी थी और छुट्टियाँ बिताने जम्मू चले
गये।
सुना कि तीस मार्च के बाद महात्मा गाँधीजी ने आदेश दिया कि 3 अप्रैल को
देशभर में हड़ताल की जाय और जलसे-जुलूस निकाले जायें। आप भी लाहौर
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 185