भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 189, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहा गया, “शान्त रहो। आज तो शान्ति से प्राण दो।” कहने वाला एक अंग्रेज़
था। उससे आपने कहा, “देखो जी! आज शान्ति कैसी? मैं तो चाहता हूँ कि आग
भड़के। चारों ओर आग भड़के। तुम भी जलो, हम भी जलें। हमारी गुलामी भी जले।
आख़िर में हिन्दुस्तान कुन्दन बनकर रहे।” आपने झट उछलकर स्वयं गले में फाँसी
का फन्दा डाल लिया। इस तरह वह वीर भी आज़ादी-देवी के चरणों में अपने प्राण
बलिदान कर गया।
जज आपके बारे में लिखता है –
"Awadh Behari is a youngman of great intellectual ability.
He stood second in the Ist division of the Punjab University B.T.
Examination."
कि अवधबिहारी (25 वर्ष का) नौजवान है और बहुत ही योग्य है। वह पंजाब
विश्वविद्यालय की बी.टी. की परीक्षा में पंजाबभर में दूसरे स्थान पर रहा है। उनके
ख़िलाफ़ यह सबूत भी पेश हुआ कि आपके साथ मास्टर अमीरचन्द का बहुत प्रेम
भी इस बात का प्रमाण है कि वे साज़िश के सदस्य थे और प्रेम का सबूत यह
है कि आपको मास्टर अमीरचन्द जी (ने) 'Dear Awadhji' (प्यारे अवध जी)
लिखा था।
श्री बसन्तकुमार बिस्वास
आप नदिया ज़िला (बंगाल) के रहने वाले नौजवान थे। आपकी उम्र 23 वर्ष थी।
अच्छे पढ़े-लिखे सज्जन थे। पहले आपको रासबिहारी अपने साथ ले आये व अपने
घर में कर्मचारी बनाकर रखा। बाद में आपको लाहौर भेज दिया गया और वहाँ वह
पापुलर डिस्पेंसरी में कम्पाउण्डर भरती हो गये। दिल्ली में बम के दिनों आप लाहौर
से कई दिन ग़ायब रहे।
कहा जाता है कि लारेन्स गार्डन का बम आपने ही अवधबिहारी के साथ
मिलकर रखा था। बाद में आप दो और बम लाये, जोकि दीनानाथ के कथनानुसार
भाई बालमुकुन्द के पास थे। दिसम्बर, 1913 में आप बंगाल लौट गये और 1914
में वहीं से पकड़कर लाहौर लाये गये। ओडायर को दिल्ली में बम चलाने वालों
का पता न चलने से बड़ा गुस्सा आ रहा था, इसीलिए जब आपको उम्रकैद की
सज़ा हुई तो उन्होंने सज़ा बढ़ाने की अपील की। ओडायर ने खुद माना है कि उसने
भी सज़ा बढ़ाने की सिफ़ारिश की। चीफ़ कोर्ट के जज ने लिखा है कि कहा जाता
है, वह कोई बहुत बुद्धिमान आदमी नहीं था। साधारण बुद्धि का आदमी था, इसलिए
उसे टूल बनाकर उससे काम लिया जाता था और वह रासबिहारी के हाथों में
खेलता था। वह ग़लत है। वह लिखता है –
"He is not a boy, for at 23 an Indian has long reached maturity....
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 183