भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 116, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहते थे कि लड़का बड़ा होनहार है। लेकिन आपने कॉलेज तो क्या, पूरी दुनिया
की फ़िलासफ़ी पर लात मार दी और सबकुछ छोड़कर युगान्तर दल में जा मिले।
आपको डिफेंस ऑफ़ इण्डिया एक्ट के अनुसार गिरफ़्तार किया गया और
अकथनीय व असहनीय कष्ट दिये गये। एक दिन आपके सर पर पाखाना डाल
दिया गया और चार दिन तक कोठरी में बन्द रखा गया। मुँह धोने तक के लिए
पानी नहीं दिया गया और बुरी तरह मार-मारकर पूरा बदन ज़ख़्मी कर दिया गया।
लेकिन आपके पास चुप से अधिक क्या रखा था।
1920 में छूटे तो एक मामूली कार्यकर्ता की तरह कांग्रेस में काम करते रहे।
घर से ग़रीब हैं, लेकिन अपना घर तबाह करके भी दुनिया में सेवा होती है। आप
1923 में यू.पी. आये और फिर ‘युगान्तर’ दल की नींव रखी। 1924 में बंगाल लौट
गये और पकड़े गये। पहले आपको आर्डिनेंस के तहत पकड़ा था, फिर यहाँ काकोरी
लाया गया। आपको दस बरस क़ैद हुई है। बेहद ख़ूबसूरत नौजवान हैं। जज ने
आपकी बड़ी तारीफ़ की है।
श्री गोविन्द चरणकार उर्फ़ डी.एन. चौधरी लखनऊ से पकड़े गये थे। आप
बहुत पुराने क्रान्तिकारी हैं। 1918 या 1919 में ढाका में पुलिस आपको पकड़ने
आयी। आपने गोलियों का जवाब गोलियों से दिया और गोलियों में से लड़ते-लड़ाते
भाग निकले, लेकिन गोलियाँ ख़त्म हो चुकी थीं और आप घायल हो गये थे। पकड़े
गये, कालापानी मिला। 1922 में बहुत बीमार हो गये थे, तब छोड़े गये। 1925 में
फिर पकड़े गये और अब 10 साल क़ैद हो गयी है।
अब श्री सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य सम्बन्धी कुछ लिखेंगे। आप भी बनारस के
रहने वाले थे। बनारस षड्यन्त्र के समय आपकी उम्र 16 बरस की थी, पकड़े
गये। लेकिन कुछ प्रमाणित न होने से छूट गये और फिर नज़रबन्द कर
बुन्देलखण्ड में रखे गये। आप हिन्दी के बड़े प्रसिद्ध लेखक हैं। कानपुर के
‘प्रताप’ जैसे प्रसिद्ध अख़बार के सहायक सम्पादक थे। आप बनारस से पकड़े
गये और अब आपको सात साल क़ैद हुई है। आप बहुत सुन्दर गाते हैं। जेल में
आप योगाभ्यास करते थे।
श्री राजकुमार कानपुर के रहने वाले हैं। आप बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में
बी.ए. में पढ़ते थे। पकड़े गये। आपके कमरे से दो रायफ़लें निकलीं। बहुत सुन्दर
गाने वाले और देखने में भी आप काफ़ी सुन्दर हैं। जोशीले बहुत हैं। श्री दामोदर
स्वरूप जब बहुत बीमार होने पर भी कोर्ट में बुलाये गये तो आपको जोश आ गया
और आपने जज को ख़ूब सुनायी। जज ने कहा कि फ़ैसले के समय तुम्हें इसका
मज़ा चखाया जायेगा। वीर युवक को दस साल की सज़ा हो गयी! जीवन एक तरह
से तबाह हो गया, लेकिन आप हँस दिये। धन्य हैं ये वीर और इन्हें जन्म देने वाली
वीर माताएँ।
110 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़