भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 114, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंफिर सितम्बर के अन्त में हार्टन ने गिरफ्तारियों के वारण्ट जारी किये और 26
सितम्बर को बहुत-सी तलाशियाँ ली गयीं और बहुत-से व्यक्ति पकड़ लिये गये।
कुछ नहीं पकड़े गये। उनमें से एक श्री राजेन्द्र लाहिड़ी दक्षिणेश्वर बम केस में
पकड़े गये और वहीं उन्हें दस बरस क़ैद हो गयी। और श्री अशफ़ाक़उल्ला और
शचीन्द्र बख्शी बाद में पकड़े गये, जिन पर अलग मुक़दमा चला।
जज के फ़ैसले से यह पता चलता है कि असहयोग आन्दोलन दब जाने से
देशभक्त युवकों का शान्ति से विश्वास उठ गया और उन्होंने युगान्तर दल स्थापित
किया। श्री जोगेशचन्द्र चट्टोपाध्याय बंगाल से इस दल का संगठन बनाने यू.पी.
आये और पक्का काम कर सितम्बर, 1924 में लौट गये। उस समय बंगाल में
आर्डिनेंस पास हो चुका था और आप लौटते ही हावड़ा पुल पर पकड़े गये। तलाशी
लेने पर आपकी जेब से एक काग़ज़ मिला, जिस पर यू.पी. की राज्य परिषद की
किसी बैठक का और यू.पी. में अपने दल के संगठन का हाल लिखा हुआ था।
खैर, फिर काम चल पड़ा और काम चलाने की ख़ातिर कई डकैतियाँ भी की गयीं।
जज के विचार में इस दल के नेता हैं — श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल।
श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल का नाम किससे छिपा है। आप ही ‘बन्दी जीवन’
जैसी प्रसिद्ध व शानदार पुस्तक के लेखक हैं। बनारस के निवासी हैं और 1915
के ग़दर आन्दोलन में आपने खूब काम किया था। आप बनारस षड्यन्त्र के नेता
व श्री रासबिहारी जी का दायाँ हाथ थे। तब उम्रक़ैद हुई थी लेकिन 1920 में छूट
गये थे। फिर आप अपने पिछले काम पर ही जुट गये और सन् 1925 के शुरू में
‘दि रेवल्यूशनरी’ परचा एक ही दिन में सारे हिन्दुस्तान में बँटा। उसकी भाषा व
अच्छे विचारों की अंग्रेज़ी अख़बारों ने भी खूब तारीफ़ की थी। आप फ़रवरी में
पकड़े गये। आप पर उस सम्बन्ध में मुक़दमा चलाया गया और आपको दो साल
क़ैद की सज़ा मिली। वहीं से आपको काकोरी के मुक़दमे में घसीट लिया गया।
आप बड़े ज़िन्दादिल हैं। कोर्ट में स्वयं खुश रहना और दूसरों को खुश रखना ही
आपका काम था। आप ने अपना मामला स्वयं लड़ा। जज आपको ही सबका गुरु
कहता है। ‘बन्दी जीवन’ का गुजराती व पंजाबी में अनुवाद हो चुका है।
आप अंग्रेज़ी और बंगाली के उच्च कोटि के लेखक हैं। अब आपको दो
उम्रक़ैद हो गयी है।
आपके साथ आपका छोटा भाई भूपेन्द्रनाथ सान्याल भी घसीट लिया गया। वह
क़रीब बी.ए. में पढ़ता था। पकड़ा गया और उसे पाँच साल की क़ैद हो गयी।
श्री शचीन्द्र के बाद अत्यन्त प्रसिद्ध वीर श्री रामप्रसाद हैं। आप जैसा सुन्दर,
मज़बूत जवान खोजने से मिलना भी मुश्किल है। बहुत योग्य आदमी है। हिन्दी का
बड़ा लेखक है। आपने ‘कैथराइन’, ‘बोल्शेविकों के काम’, ‘मन की लहर’ आदि
अनेक पुस्तकें लिखीं। आप उर्दू के माने हुए शायर हैं। आपकी उम्र 28 बरस की
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