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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 408 में से

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पृष्ठ 97

काशी केन्द्र की कहानी | 95
यह विश्वास ही न कर सकते थे कि सचमुच विप्लव का झंडा खड़ा कर दिया
जायगा। जन्म-भर का दुखिया जिस प्रकार किसी भी तरह यह विश्वास नही कर
पाता कि किसी दिन उसका भी नसीब जागेगा—उसे सुख मिलेगा—जिस प्रकार
ऐसा व्यक्ति, जो सदा लापरवाही से दुतकारा गया है, जो बार-बार धोखा खा
चुका है, वह आशा की कल्पना मे मुग्ध होकर सारा जीवन भले बिता दे पर वह
किसी तरह यह विश्वास नही कर पाता कि किसी दिन वह भी फिर किसी का
प्रेमास्पद होगा, इसी तरह मै भी भारत के भाग्योदय के सम्बन्ध मे हताश हो
चुका था।