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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 79, कुल 408 में से

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पृष्ठ 79

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पंजाब की कथा
पिंगले के जीवन की पिछली बातों का आज मुझे ठीक-ठीक स्मरण नहीं।
आज तो इतना ही याद पड़ता है कि साधु होकर उन्होंने समूचे भारत की
यात्रा की थी और फिर अमेरिका के मैकेनिकल इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ते समय
वहाँ के विप्लव दल में सम्मिलित हो गए थे; किन्तु यह नहीं मालूम कि वह
किसलिए साधु हुए और क्यों इंजीनियर हुए और इसके पश्चात् किम तरह गदर-
पार्टी में शामिल हुए ? शायद स्वयं पिंगले ने भी इस विषय में और कुछ नहीं
बतलाया था ।
इस अध्याय में जो बातें मुझे कहनी हैं उनमें से बहुतेरी बातें आज स्मृति में
धूमिल हो गई हैं, इससे शायद कुछ बातें लिखने से रह जायें । ऐसा लगता है कि
इस भूल जाने और याद रहने के साथ हमारी प्रकृति का घना सम्बन्ध है । हमारे
स्मृतिपट पर कितनी ही बड़ी-बड़ी चीजें छोटा रूप धारण कर लेती हैं और छोटी
चीजें बड़े रूप में आ जाती है, फिर बहुतेरी बातो को न जाने हम किस तरह भूल
ही जाते है। इसका कारण यह मालूम होता है कि जो बात हमारे स्वभाव के
अनुकूल है, जिसका हमारी प्रकृति से मेल मिलता है वह चाहे कोई घटना हो या
कोई दार्शनिक मत अथवा चाहे कुछ और हो, वह तो हमारे चेतन अथवा अव-
चेतन में भी स्मृति-पट पर चित्र की भाँति अपने आप अंकित हो जाती है । परन्तु
जो बात हमारे स्वभाव के प्रतिकूल होती है उसे या तो हम भूल जाते हैं या केवल
खण्डन करने के लिए ही याद रखते हैं और खण्डन करने मे जिन युक्तियों तथा
घटनाओं से हमें सहायता मिलती है उन्हें भी हम अपनी अवस्था और अभिज्ञता
के अनुरूप याद रखते हैं ।
मुझे याद आता है कि अण्डमन द्वीप में रहते समय एक दिन रामेन्द्र बाबू की
'विचित्र प्रसंग' नामक पुस्तक पढ़ने से बिलकुल इसी ढंग के अनेक प्रकार के
विचार मन मे गम्भीर भाव से फैल गए थे और उनको मैंने अपनी नोट-बुक में लिख
रखा था । उन्हें मैं उपेन्द्र दादा (उपेन्द्रनाथ बनर्जी जो कि 'युगान्तर' के सम्पादक
थे और जिन्हें अलीपुरवाले मामले में काला पानी हुआ था) को प्रायः दिखलाता
था और वह उनकी तारीफ़ करते तो इमसे मन में बड़ा आनन्द होता था ।
अण्डमन की बातें जहाँ लिखी जाएँगी वही बतलाया जाएगा कि मेरी वह नोट-