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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 408 में से

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पृष्ठ 70

68 / बन्दी जीवन
में बाहरी आदमियों के जाने-आने की रोक-टोक नहीं है। किन्तु फिर भी बारक में
किसी से कुछ भी परिचय न होने के कारण उस दिन वहाँ जाने की हिम्मत न
हुई। हिन्दुस्तानी और अंग्रेजी फौज की कुछ बातें मालूम करके हम लोग उस
दिन घर की ओर लौट पड़े। काशी में सिक्खों की पलटन देखने से मुझे उस दिन
बहुत ही उत्साह हुआ क्योंकि पंजाब में जाकर मैंने देख लिया था कि सिक्खों को
बड़ी सरलता से उत्तेजित किया जा सकता है। इसके सिवा यह भी सोचा था कि
यदि यह पलटन यहाँ कुछ दिन तक बनी रहे तो पंजाब से सिक्ख नेताओं को
यहाँ बुलाकर सहज ही काम कर लिया जाएगा। उस दिन मेरी एक यही कामना
थी कि यह सिक्खों की टुकड़ी कुछ दिन तक और यही बनी रहे। इन दिनों कोई
भी सेना की टुकड़ी एक स्थान पर बहुत दिनों तक न रहने पाती थी। यह टुकड़ी
भी थोड़े ही समय में, कितनी ही छावनियों की सैर कर आई थी और कुछ भरोसा
न था कि न जाने किस दिन यहाँ से कूच करने का हुक्म हो जाय।
इधर दिसम्बर की पाँचवी तारीख आ गई। यथासमय स्टेशन पर जाकर
देखा कि पंजाब मेल धक-धक करती हुई प्लेटफार्म पर आ गई। मन में तरंग
उठी कि हमारे विप्लव की तैयारी के साथ इंजन का बहुत घना सम्बन्ध है, इसी
से उसका प्रचण्ड वेग देखकर मैंने सोचा कि मानो पंजाब के विप्लव का समाचार
लेकर वह पागल की तरह दौड़ता आ रहा है। अब पंजाब की चिनगारियाँ इसी
दम बात की बात में इस प्रान्त में भी फैल जाएँगी। किन्तु गाड़ी में पृथ्वीसिंह
के दर्शन न हुए। उनको बहुत ढूँढा किन्तु कहीं न देख पड़े। तब पंजाबियों पर
बहुत क्रोध हुआ कि इन्हें वक़्त की क़द्र मालूम नहीं। अब क्या किया जाय? उन
लोगों को ढूँढ़ना सहज काम नहीं है। जाकर दादा को सब समाचार सुनाया।
यह अनुमान किया गया कि किसी कारण से पृथ्वीसिंह आज यहाँ न पहुँच सके
होंगे, इसलिए मैं अगले दिन फिर स्टेशन पर गया किन्तु आज का जाना भी व्यर्थ
हुआ। तीसरे दिन जाने पर भी भेंट न हुई।