बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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पर विप्लव शुरू हो जाएगा उस दिन हजारों आदमी हमारे साथ आ मिलेंगे। यदि
पंजाब में गदर हो जाएगा तो यह भी निश्चित समझिए कि उस दिन बंगाल बैठा-
बैठा तमाशा न देखेगा और अंग्रेजों को बंगाल के लिए इतनी उलझन में पड़ना
होगा कि सरकार अपनी कुल शक्ति पंजाब ही पर न लगा सकेगी।" मैंने यह भी
कहा, "बंगाल इस समय भी सरकारी खजाने लूट सकता है या पुलिस की बारकों
पर छापा मारना इत्यादि काम कर सकता है, किन्तु आगे क्या होगा ? इस 'आगे
क्या होगा' को सोचकर ही बंगाल ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया।" मैंने इन
लोगों को भली-भाँति समझा दिया कि "हम लोगों से सलाह लिए बिना अचानक
कुछ कर न बैठना।" यह भी कह दिया, "खूब सावधानी से काम करना होगा
जिसमें कि यह शक्ति व्यर्थ न हो जाय, सिर्फ़ हू-हा करके फ़िजूल कामों में शक्ति
क्षीण न कर दी जाय।" मैंने इन्हें सलाह दी कि अधिकांश व्यक्तियों से कहो
कि अपने-अपने गाँव में जाकर रहें, केवल मुखियों का और काम करने के लिए
थोड़े-से आदमियों का समीप रहना ठीक होगा, और सब लोगों को कई टुकड़ियों
मे बाँटकर प्रत्येक टुकड़ी पर एक-एक अधिनायक तैनात कर दीजिए। ऐसा
संगठन करने से जिस समय आवश्यकता होगी उस समय सब लोगों से अनायास
ही काम लिया जा सकेगा। यदि इस प्रकार छोटी-छोटी टुकड़ियां न बनाई जाएँगी
तो गिरफ़्तार हो जाने का अन्देशा हर घड़ी रहेगा।" फिर करतार्रसिंह से
कहा, "आपमें से कोई एक व्यक्ति मेरे साथ चले, मैं उसे उस स्थान पर ले
जाऊँगा जहाँ कि रासबिहारी हैं। रासबिहारी के साथ अच्छी तरह सलाह
करनी है।" यह बात इन्हें पसन्द आई। अब निश्चय हुआ कि लाहौर मे पृथ्वी-
सिंह से दोबारा मुलाकात करके, उनको साथ लेकर, रासबिहारी के पास भेंट
करने को जाना ठीक होगा।
करतारसिंह ने हमारे यहाँ से कुछ रिवाल्वर इत्यादि की सहायता माँगी।
आत्मरक्षा करने और छोटे-छोटे सरकारी खजाने लूटने के लिए कुछ अस्त्र-शस्त्रों
की ज़रूरत थी। अमेरिका से ये लोग जब स्वदेश को लौटे तब अनेक स्थानों से
थोड़े-बहुत रिवाल्वर इत्यादि ले आए थे। अंग्रेजों की प्रखर दृष्टि रहने पर भी ये
रिवाल्वर देश में पहुँच गए थे। बाल्टी की तली में लकड़ी या टीन का पटरा
लगाकर उसके बीच में छिपाकर रिवाल्वर इत्यादि लाए जाते थे किन्तु कुछ दिनों
में रिवाल्वर लाने की यह तरक़ीब जाहिर हो गई। कभी-कभी यह भी होता
था कि भारत के बन्दरगाह में पहुँचने से ज़रा देर पहले ये हथियार खलासियों के
ज़िम्मे कर मुसाफ़िर चले आते थे और फिर फुरसत तथा मौका देखकर उनके
पास से उठा लिए जाने थे। इस रीति से इन लोगों के हाथ कुछ रिवाल्वर आ
गए थे। किन्तु अभी हथियारों की ज़रूरत थी ही। मैं काशी से कुछ रिवाल्वर
और गोलियाँ लाया था। ये सब करतारसिंह को सौंपकर मैंने कहा कि इस वक़्त
यही सामान पास था सो लेता आया, फिर और भी ला दूंगा किन्तु यह भी जता
दिया कि हम लोगों के पास अस्त्र-शस्त्रों का अधिक संग्रह नहीं है, अतएव इस