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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 408 में से

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पृष्ठ 57

पंजाब यात्रा / 55
जो अहंकार दूसरे पर नोक-झोंक किए बिना ही अपने प्राणों में शक्ति के अनुभव
को जाग्रत करता है वही आत्मविश्वास है।
जो हो, इन लोगों से मुझे पंजाब की बहुत कुछ हालत मालूम हो गई। उनमें
से बहुतेरी बातों का वर्णन पहले किया जा चुका है। इनकी बातों से ज्ञात हुआ
कि इनके विप्लव की तैयारी का मुख्य अवलम्बन पंजाब की सिक्ख फौजें हैं।
करतारसिंह से ज्ञात हुआ कि भारत में अमेरिका से सिक्खों का जो पहला दल
आया था उसी में वे भी आए थे और सितम्बर महीने से इस काम की तैयारी
कर रहे हैं, इत्यादि।
अब करतारसिंह ने मुझसे पूछा, "अस्त्र-शस्त्र आदि देकर के बंगाल हमारी
कहाँ तक सहायता कर सकता है ? बंगाल में कितने हज़ार बन्दूकें हैं ?" इत्यादि ।
मैंने कहा, "आप क्या ख्याल करते हैं ? बंगाल में कितने अस्त्र-शस्त्र होंगे ?"
करतारसिंह, "मैं तो समझता हूँ कि बंगाल में काफ़ी हथियार मौजूद कर
'लिये गए है, क्योंकि बंगाल तो बहुत दिनों से विप्लव की तैयारी कर रहा है और
हमारे दल के परमानन्द के एक बंगाली मित्र ने उन्हें पाँच सौ रिवाल्वर का वचन
दिया है। इसके लिए परमानन्द बंगाल गए हैं।"
मैं, "जिन्होंने परमानन्द से यह बात कही है वह कोई फालतू आदमी जँचते
हैं। क्योंकि बगाल में कोई कही पाँच सौ रिवाल्वर न दे सकेगा। जिन्होंने यह बात
कही है उन्होंने गप्प उड़ा दी है।"
करतारसिंह, "तो फिर बंगाल हमको किस प्रकार की सहायता देगा ? तो
क्या वहाँ भी पंजाब के साथ ही साथ गदर होगा ? बंगाल में आपके अधीन काम
करनेवाले कितने है ?" अन्य किसी समय और किसी भी व्यक्ति को ऐसे प्रश्न
करने का हम लोग मौक़ा ही न देते थे और यदि कोई पूछ ही बैठता तो कह देते
थे, "इन बातों को जानकर क्या कीजिएगा, समझ लीजिए कि कुछ भी तैयारी
नही हुई है ; तो भी आप इस दल मे संयुक्त होगे या नही ? आपका स्वयं आरम्भ
मे ही तैयारी करनी होगी, इस दशा मे भी क्या आप इस दल में भर्ती होना चाहते
हैं ?" इत्यादि । हाँ, बगाल में कही-कही कोई-कोई ऐसे भी थे जो विप्लव की
जंगी तैयारी की बातें बढ़ा-चढ़ाकर लोगों को सुनाते और इस तरह प्रलोभन
देकर उन्हें दल में भर्ती करते थे। जो हो, करतारसिंह ने जब ये प्रश्न किए तब
उनको ठीक उत्तर न देकर टाल देना मुनासिब न हुआ। मैंने कहा, "देखिए,
जिस प्रकार यहाँ आपको सैनिकों में भर्ती होने का अवसर मिलता है, उस प्रकार
बंगाल में यदि हम लोगों को फौज में भर्ती होने का सुभीता मिलता तो अब तक
कभी का भीषण विप्लव मच गया होता। बंगाल के दल में प्रधानतया युवक और
छात्र-श्रेणी के सदस्य हैं और इस दल में हम लोग बड़ी ही सावधानी से, बहुत-
कुछ छानबीन करके ऐसे लोगों को सम्मिलित करते हैं जोकि हर घड़ी मरने को
तैयार रहते हैं। इसलिए हमारे दल में अधिक आदमी नही हैं, शायद हज़ार-दो
हज़ार से अधिक न हों, किन्तु यह दृढ़ विश्वास है कि जिस दिन आमतौर