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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 408 में से

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पृष्ठ 54

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पंजाब यात्रा
इस विप्लव की तैयारी के समय काशी में, बाहरी लोगों से मुलाक़ात करने
के लिए खास-खास मकान थे। पंजाब से जो लोग मुलाक़ात करने आते थे वे
पहले ऐसे ही खास मकान में पहुँचाए जाते थे। वहाँ से खबर मिलने पर दूर से
आगन्तुक व्यक्ति को छिपकर पहचान लिया जाता था। तब, सन्देह न रहने पर,
उससे भेंट की जाती थी। मैं उस दिन काशी में ही था जब पंजाबी दल का एक
मनुष्य वहाँ के विप्लव की तैयारी का समाचार लेकर हमारे पास आया। जब
उसके मुंह से सुना कि विप्लव के लिए दो-तीन हज़ार सिक्ख कमर कसे तैयार
बैठे हैं तब हमारा अन्तरतम पुरुष आनन्द से थिरकने लगा । पजाब के कार्यकर्ताओं
ने आगन्तुक व्यक्ति द्वारा कहला भेजा था कि रासबिहारी की हमें बहुत ज़रूरत
है। दिल्ली षड्यन्त्र के फ़रार असामी प्रसिद्ध कर्मवीर रासबिहारी का नाम उस
समय अमेरिका तक में विश्रुत हो चुका था। इन लोगों ने अमेरिका में ही इनका
नाम सुना था।
कई कारणों से उस समय रासबिहारी पंजाब न जा सके, इसलिए पहले वहाँ
मेरा ही भेजा जाना तय हुआ ताकि जब मैं पंजाब की दशा अपनी आँखों देख
आऊँ और सबको वहाँ का हाल बताऊँ तब आगे का कर्तव्य निर्धारित हो।
पहले ही निश्चित हो गया था कि मैं जालन्धर शहर में जाकर सिक्खों के
नेताओं से भेंट करूँगा। उस समय नवम्बर का महीना खत्म होने को था।
पश्चिम में ठण्ड का मौसम था। उसी शीतकाल के प्रातःकाल लुधियाना में गाड़ी
पहुँचते ही देखा कि मेरे मित्र के परिचित एक सिक्ख युवक हम लोगों की प्रतीक्षा
कर रहे हैं। मित्र ने इनसे मेरा परिचय करा दिया। यही करतारसिंह थे। वह
गाड़ी में सवार होकर हमारे साथ जालन्धर की ओर रवाना हुए। रास्ते में थोड़ी-
बहुत बातें हुईं। उनसे मालूम हुआ कि इस समय लुधियाना में दो-तीन सौ मनुष्य
एकत्र हुए हैं। जुदा-जुदा काम करने के लिए ये लोग विभिन्न दिशाओं में भेजे
जाएँगे। ये लोग गुरुद्वारे में अध्ययन करने के बहाने एकत्र होते थे।
उस दिन की बात मुझे आज खासी स्मरण है। गाड़ी के उस डिब्बे में हम
कई आदमी एकत्र हुए थे, किन्तु सभी के मन का भाव कई तरह का था। हम
तीनों व्यक्ति बीच-बीच में एकाध बात कर लेते थे सही, किन्तु हृदय में न जाने