बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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परस्पर एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और समवेदना-जनित एकता भारत की
अन्यान्य जातियों की अपेक्षा बहुत अधिक है।
जो लोग अमेरिका से लौटकर आये थे उनमें अधिकतर ऐसे लोग थे जो कि
वहाँ कुलीगिरी किया करते थे। इनमें जिनके पास से तीस हज़ार रुपये ज़ब्त कर
लिए गये थे वह कैलिफोर्निया में खेती करके धनवान् हुए थे। इनका नाम था
सरदार ज्वालासिंह।
इन लोगों के बहुत-से रिश्तेदार और भाई-बन्धु भारत की फौज मे नौकर थे।
देश में आते ही इन लोगों ने सैनिकों के साथ गुप्त अभिसंधि करनी शुरू कर
दी। उसी समय बंगाल के साथ पंजाब का सम्बन्ध जुड़ गया। अन्य अनेक गुण
होने पर भी पंजाब के लोगों में संगठन की वैसी योग्यता न थी जैसीकि बंगाल-
वालों में थी। बंगाल के साथ उनका संयोग हो जाने पर बड़े अच्छे ढंग से काम
होने लगा। उत्तर भारत की प्रायः सभी छावनियों में हमारे दल के आदमी आने-
जाने लगे। उत्तर-पश्चिम अंचल के बन्नू से लेकर दानापुर तक कोई भी छावनी
अछूती न रखी गई। प्रायः सभी रेजिमेंटों ने वचन दिया था कि पहले वे लोग
कुछ भी न करेंगे; हां, गदर शुरू हो जाने पर वे अवश्य ही विप्लवकर्ताओं से मिल
जाएँगे। सिर्फ लाहौर और फीरोजपुर की रेजिमेंटों ने सबसे पहले काम शुरू कर
देना स्वीकार किया था। आरम्भ में सरकार यह नही समझ सकी कि गुप्त
विप्लव योजनावाले इतनी गहरी नींव देकर काम शुरू कर रहे हैं। यदि ऐसा न
होता तो इतना अधिक काम हो ही न सकता। पंजाब के पुलिस विभाग के एक
मुसलमान डिप्टी सुपरिण्टेण्डेण्ट ने अपने एक मुखबिर को इस दल में शामिल करा
दिया था। अन्त मे उस कृपालसिंह ने ही कृपा करके सारी बातें प्रकट कर दी।