बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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सिक्ख दल का परिचय
इस दल में कृपालसिंह किस प्रकार भर्ती हो गया और उसने किस प्रकार,
कब सारी बातें प्रकट कर दी इसका उल्लेख यथास्थान किया जाएगा। अभी तो
इस सिक्ख दल का थोड़ा-सा परिचय देने की चेष्टा करता हूँ।
इस दल में कुछ कम मेम्बर न थे। उत्तरी अमेरिका और कनाडा से भिन्न-
भिन्न दलों में कोई छः-सात हज़ार सिक्ख देश में वापस आए थे। किन्तु सन्
1914 के Ingress Ordinance Act के अनुसार बहुतेरे लोग जेल में ठेल दिये
गए तथा और भी बहुतेरे लोग नज़रबन्द कर दिये गए जिससे वे अपना गाँव छोड़-
कर कही आ-जा न सकते थे। जो लोग नज़रबन्द थे उन्हें विप्लव-कार्य में सहायता
देने का विशेष अवसर नहीं मिला। क्योंकि सूर्यास्त और सूर्योदय के दरम्यान इन्हें
अपने घर पर मौजूद रहना पड़ता था। यह इसलिए कि क्या जाने पुलिस किस
समय इनकी जाँच करने पहुँच जाय। दिन निकल चुकने पर भी ये लोग अपने गाँव
से बाहर न जा सकते थे। किसी दूसरे गाँव का कोई भी व्यक्ति इनसे प्रकट रूप में
मिल-जुल न सकता था। बाद में जब काम अच्छे सिलसिले से होने लगा तब उनमें
से जिन-जिनको देश का काम करने की प्रबल इच्छा हुई वे पुलिस की नज़र बचा-
कर खिसक गए। अर्थात्, क्या पुलिस, क्या उनके घर के लोग और क्या रिश्तेदार
—किसी को उनकी खबर न मिलती थी।
जिस भाव को हृदय में लेकर ये दल भारत में आए थे, स्वदेश में पदार्पण
करने के पश्चात् ही उनमें से बहुतों का वह भाव बदल गया। अमेरिका से लौटे
हुए इन छः-सात हज़ार मनुष्यों में से कोई आधे लोग अपने घर-गृहस्थी के कामों
में जा फँसे। किन्तु अवशिष्ट सिक्ख बड़े उत्साह के साथ विप्लव कार्य में लगे रहे।
अमेरिका से लौटे हुए इन लोगो में अधिकांश सिक्ख ही थे। ऐसे लोग इने-
गिने ही थे जो कि सिक्ख न थे। शायद पचीस-तीस हों। वे प्रायः सब वयस्क थे।
बहुतों के स्त्री, परिवार और बाल-बच्चे सब कुछ थे। इनमें से बहुतों की उम्र
चालीस वर्ष से ऊपर थी। कुछ लोग तो बूढ़े थे। भाई निधानसिंह, भाई सोहन-
सिंह, भाई कालसिंह, भाई केहरसिंह —इनमें से किसी की उम्र पचास वर्ष से कम
नही थी।
दिल्ली षड्यन्त्र के मुक़दमे में जो लोग गिरफ़्तार हुए थे उनमें से कई एक