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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 399, कुल 408 में से

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पृष्ठ 399

कुछ पूरक तथ्य / 397
करके जब गांधीजी तथा महादेव देसाई लौट रहे थे, तो उन्होंने सीमाप्रांत के
राष्ट्रीय मुस्लिम नेता आगा लाला बादशाह, अनीगुल खान और अब्दुल करीम
भी उसी गाड़ी से सफर कर रहे थे। इस अवसर पर गांधीजी ने इन नेताओं से कहा
था, "अफ़गानिस्तान में शीघ्र ही अंग्रेज़ अमानुल्ला खां के शासन के विरुद्ध विद्रोह
आरम्भ कराने वाले हैं। अंग्रेजों का षड्यन्त्र यह है कि अमानुल्ला को हटाकर
अपने किसी पिट्ठू को गद्दी पर बैठा दिया जाए। आप लोगों को इस पर दृष्टि
रखनी चाहिए और अमानुल्ला की सहायता करनी चाहिए। भारत का हित भी
इसी बात में है।" भारतीय क्रान्तिकारियों ने इस प्रकार अमानुल्ला खां के पक्ष
में लोकमत तैयार किया और यद्यपि वे अमानुल्ला खा को नही बचा सके, किन्तु
बच्चा सक्का भी क़ाबुल की गद्दी पर नही रह सका और इस प्रकार अंग्रेज अपने
षड्यंत्र में पूरी तरह सफल नही हो सके। इससे ईरान आदि देशों के स्वतन्त्रता
आन्दोलन को जो लाभ पहुँचा, वह भी सर्व-विदित है। भारत को तो लाभ हुआ
ही।
भारत छोड़ने से पूर्व श्री सुभाष की सेनाओं से सम्पर्क
द्वितीय विश्वयुद्ध मे विदेश प्रवासी भारतीय क्रान्तिकारियों ने जो कार्य किया,
उससे भारत को स्वाधीनता प्राप्त करने मे बहुत महत्त्वपूर्ण सहयोग मिला।
आज़ाद हिन्द सरकार और आज़ाद हिन्द फ़ौज के निर्माण मे सर्व प्रथम प्रयास
रासबिहारी बोम, स्वामी सत्यानन्दपुरी (जो बगाली क्रान्तिकारी दल के पुराने
सदस्य थे) और प्रीतमसिंह (गदर' पार्टी के पुराने कार्यकर्ता) ने किया था। प्रायः
ऐसा समझा जाता है कि श्री सुभाष बोस ब्रिटिश सरकार के दमन पाश से बचने
के लिए भारत से चले गए और फिर विदेशो मे जाकर उन्हें यह सूझा कि भारतीय
फ़ौजो के बन्दी सिपाहियों का सगट- करके अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ा जाय। किन्तु
यह धारणा सही नही है। श्री सुभाष जब कांग्रेस मे पृथक् हुए थे और फारवर्ड
ब्लाक स्थापित करके देश-भर मे दोग करके प्रवार कार्य कर रहे थे, उस समय
भी उनके मस्तिष्क मे यही योजना थी। इस दौर' में उनके साथ श्री त्रैलोक्यनाथ
चक्रवर्ती भी किसी दूसरे नाम से थे, जो बंगाल के क्रान्तिकारी दल के प्रभावशाली
नेता थे और जिनका उल्लेख श्रो शचीन्द्र ने भी प्रशंसात्मक शब्दों में एक-दो
स्थान पर अपनी पुस्तक मे किया है। श्री चत्रवर्ती ने लिखा है कि सन् 1940 में
जब श्री सुभाष बोस के सभापतित्व मे दिल्ली मे छात्र सम्मेलन हुआ था तभी
लाला शंकरलाल के घर पर फारवर्ड ब्लाक की कार्यकारिणी बैठक भी हुई थीं।
इस बैठक मे मै भी सम्मिलित हुआ था। उक्त बैठक में जो नेता सम्मिलित हुए
थे, उनमे सीमाप्रान्त के नेता अकबरशाह भी थे। ...उपस्थित नेताओं में जिन
लोगों को सुभाषबाबू विप्लव मनोवृत्ति का समझते थे, उनसे घनिष्ठता से मिलाने
और विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से मेरा परिचय करा देते थे। अकबरशाह
के बारे में सुभाष बाबू की ऊंची धारणा थी। वे सुभाष बाबू के विशेष भक्त और