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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 390, कुल 408 में से

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पृष्ठ 390

388 / बन्दी जीवन
यह विराट् प्रयास सहस्रों देशभक्तों, की आहुतियों की कहानी मात्र बनकर समाप्त
हो गया ।
हबीबुल्ला खां की हत्या
क़ाबुल में भारतीय क्रान्तिकारियों की इस असफलता का मुख्य कारण
मौलाना उबेदुल्ला सिन्धी ने तत्कालीन अमीर हबीबुल्ला खां को बताया है । डा०
भूपेन्द्रनाथ दत्त आदि क्रान्तिकारियों ने जो उस समय बर्लिन में काम कर रहे थे,
इसका कारण यह बताया कि जर्मनों ने अमीर को जितनी सहायता करने का
आश्वासन दिया था, वह पूरा नहीं हुआ । किन्तु हमें मौलाना उबेदुल्ला की बात
अधिक प्रामाणिक जान पड़ती है । इन सब घटनाओं के कुछ ही दिन पश्चात्
'जमायते सियासिया' के एक सदस्य द्वारा अमीर हबीबुल्ला की राजनीतिक हत्या
भी इस बात को प्रमाणित करती है कि अमीर अंग्रेजों से मिले हुए थे ।
अफ़गानिस्तान का भारत पर आक्रमण
काबुल के अंग्रेज-अमीर विरोधी राजनीतिक संगठन में भारत से गये हुए
मुस्लिम क्रान्तिकारियों का भारी प्रभाव था, यह तो स्पष्ट ही है । अमीर हबीबुल्ला
के छोटे भाई नसरुल्ला खां और पुत्र अमानुल्ला खां भी अमीर के विरोधी थे । यह
इसी से प्रकट है कि काबुल की आजाद हिन्द सरकार के भंग होने के पश्चात् उसके
जो सदस्य काबुल सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिये गए या निर्वासित कर दिये
गए, अमीर की हत्या के पश्चात् वे सभी न केवल मुक्त हो गए, बल्कि उनमें से
अनेक को उच्च सरकारी पद भी दिये गए । सम्भवतः अमीर की हत्या की योजना
में भारतीय क्रान्तिकारियों का भी हाथ था ।
अमीर हबीबुल्ला खां की हत्या के संदेह में जनरल नादिर खां भी गिरफ्तार
किये गए थे, जो उस समय अफगानिस्तान की सेना के उप-सेनापति थे । मौलाना
उबेदुल्ला सिन्धी के जनरल नादिर खां से बहुत अच्छे सम्बन्ध थे किन्तु वे प्रकट
रूप से जनरल नादिर खां से बहुत कम मिलते थे । अमीर हबीबुल्ला खां के पश्चात्
जब उनके पुत्र अमानुल्ला खां गद्दी पर बैठे, तो जनरल नादिर खां को रिहा कर
दिया गया और उनके एक भाई हाशिम खान को एक उच्च सरकारी पद पर
प्रतिष्ठित कर दिया गया ।
भारत की आज़ाद हिन्द सरकार के प्रधान राजा महेन्द्रप्रताप अमानुल्ला खां
के प्रगाढ़ मित्र थे । मौलवी उबेदुल्ला सिन्धी को भी अमानुल्ला खां बहुत मानते
थे । उधर जनरल नादिर खां के प्राइवेट सेक्रेटरी मौलाना जफर हुसैन थे, जो
आज़ाद हिन्द सरकार के एक महत्त्वपूर्ण पद पर थे । इस पृष्ठभूमि में जब हम
गद्दी पर बैठते ही अमानुल्ला खां को भारत पर चढ़ाई करते देखते हैं और साथ
ही सरहद पर बसे हुए आजाद कबीलों और तुरंगजई के हाजी साहब को इस युद्ध