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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 385, कुल 408 में से

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पृष्ठ 385

कुछ पूरक तथ्य / 383
इस काम मे हाथ बँटा रहे थे। खान अब्दुलगफ्फारखा ने एक बार मौलाना हुसैन
अहमद मदनी को बताया था कि इस जमाने मे, अर्थात् 1910-11 मे अनेक बार
मुझे गोपनीय सन्देशो को लेकर हाजी तुरगजई देवबन्द भेजते थे। आशय यह कि
जिस इटली-तुर्की युद्ध मे मैडिकल मिशन गया, उससे बहुत पहले ही मुस्लिम
क्रान्तिकारी दल का सगठन भारत से काबुल तक फैल चुका था। यह भी उल्लेख-
नीय है कि जो मैडिकल मिशन तुर्की गया था, उसका नेतृत्व डा० मुख्तार अहमद
अन्सारी ने किया था, जो बाद मे काग्रेस के प्रमुख नेता बने। डा० अन्सारी साहब
भी शेख महमूद उलहसन के निकट सम्पर्क मे थे। और उनको पूजनीय दृष्टि से
देखते थे। सन् 1914-15 मे शेख महमूदउलहसन जब मक्का गए और उनकी
क्रान्तिकारी हलचलो का पता अग्रेज सरकार को लगा तो डा० अन्सारी साहब से
तत्कालीन अगरेज अधिकारियो ने काफी पूछताछ की थी। एक बार तो डाक्टर
अन्सारी साहब की गिरफ्तारी की सम्भावना भी उत्पन्न हो गई थी। इस प्रकार
वास्तविकता यह प्रतीत होती है कि यह मैडिकल मिशन देवबन्द के क्रान्तिकारी
दल ने ही तुर्की की सरकार से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए भेजा था। इस
मिशन मे सरहद के कुछ शिक्षित पठान युवक भी थे, जिनमे से कुछ भारत वापस
नही लौटे और आजीवन विदेशो मे भारतीय स्वाधीनता के लिए कार्य करते रहे।
इन युवको मे अब्दुर्रहमान बेग का नाम उल्लेखनीय है, जिनके सम्बन्ध मे यह समझा
जाता है कि अग्रेजो के इशारे पर उनकी हत्या कर दी गई। उनके एक भाई
बहुत दिनो तक खान अब्दुलगफ्फार खा के प्राइवेट सैक्रेटरी रहे और अब भारत
के वैदेशिक विभाग मे किसी सम्माननीय पद पर है।

मौलाना उबेदुल्ला सिन्धी

शचीन्द्र बाबू जब दिल्ली मे क्रान्तिकारी कार्यों मे सलग्न थे, उन दिनो ही
दिल्ली मे यह मुस्लिम क्रान्तिकारी दल भी अत्यन्त सक्रिय था। दिल्ली का महत्त्व
समझते हुए सन् 1913 मे ही मौलाना महमूदउलहसन ने एक मदरसा दिल्ली मे
भी कायम कर दिया था, जिसका नाम नजारतुल मआरिफ था। मौलाना उबेदुल्ला
सिन्धी उनके प्रधान आचार्य थे। डा० अन्सारी और हकीम अजमल खा इसके
सहायको मे थे। इसमे पहले मौलाना सिन्धी ने देवबन्द मे 'जमय्यत-उल-अन्सार'
नामक संस्था बनाई थी, जिसका उद्देश्य क्रान्तिकारी सगठन के प्रचार के हेतु एक
प्रकट सगठन बनाना था, किन्तु यह संस्था पारस्परिक मतभेदो के कारण शीघ्र
ही भंग कर दी गई। इसी बीच अलीगढ की मुस्लिम यूनिवर्सिटी से विद्यार्थियो का
एक दल देवबन्द मे तालीम पाने के लिए भेजा गया। इस दल मे अनीस अहमद
नामक विद्यार्थी अग्रेजो का जासूस था। मौलाना महमूदउलहसन और उबेदुल्ला
सिन्धी बडी सतर्कता से अपना कार्य कर रहे थे, अत. अग्रेज़ों को केवल देवबन्द
आने-जानेवाले व्यक्तियो का पता ही अनीस अहमद द्वारा लगता रहा। बाद में
अनीस अहमद सी० आई० डी० विभाग मे बहुत ऊँचे पद पर पहुँचा और विदेशी