सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 379, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 379

कुछ पूरक तथ्य / 377
फिर भी अमेरिका में उसका संगठन ज्यों-का-त्यों चलता रहा । अभी कुछ दिन
पूर्व अमेरिका की सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने इस बात की जाँच की थी
कि अमेरिका की गदर पार्टी के कुछ सदस्य चूंकि रूम और साम्यवाद से सहानु-
भूति और सम्पर्क रखते हैं, अतः क्या वे अमेरिका में भी संकट उत्पन्न तो नहीं कर
सकते ? इस कमेटी की रिपोर्ट गोपनीय थी, किन्तु वह किसी प्रकार गदर पार्टी
के एक सदस्य के हाथ लग गई और स्वयं इन पंक्तियों के लेखक ने भी उसे देखा
और पढ़ा है । इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक बात तो यह बताई है कि गदर-
पार्टी की स्थापना सन् 1907 में लाहौर में हुई थी । अभी तक यही समझा जाता
रहा है कि लाला हरदयालजी ने नवम्बर, 1913 में अमेरिका के कैलीफोर्निया में
इसकी स्थापना की थी । इसके सम्बन्ध में एक प्रसिद्ध क्रान्तिकारी श्री खानखोजे,
जिन्होंने विदेशों में बहुत काम किया, इस प्रकार बताते हैं, "लगभग 1907 के
प्रारम्भ में अमेरिका के कैलीफोर्निया में जो भारतीय छात्र थे, उनमें खगेन्द्र चन्द्र-
दास, पाण्डुरंग खानखोजे, तारकनाथदास, अधरचन्द्र लसगर आदि ने भारतीय-
स्वाधीनता-संघ की स्थापना की ।...1908 में कैलीफोर्निया के संक्रामेंटों और
आरगिल स्टेटों के पोर्टलैंड नामक स्थान में संघ का केन्द्र स्थापित किया गया ।
...1913 में लाला हरदयाल और भाई परमानन्द कैलीफोर्निया आएँ । परमानन्द
दल में शामिल नहीं हुए पर हरदयाल शामिल हुए और उन्होंने सलाह दी कि दल
का नाम बदलकर 'गदरपार्टी' कर दिया जाय ।"
अमेरिका सरकार की समिति की रिपोर्ट में और इस प्रामाणिक बयान में
जो अन्तर है, उसका कारण यह प्रतीत होता है कि समिति को गदरपार्टी के किसी
पुराने सदस्य से ही यह ज्ञात हुआ होगा कि सन् 1907 में लाहौर के क्रान्तिकारियों
के बीच ही अमेरिका में इस प्रकार का एक संगठन बनाने का निश्चय हुआ होगा ।
यह स्मरणीय है कि सन् 1906-07 में पंजाब में क्रान्तिकारी बहुत ही सक्रिय थे ।
सरदार भगतसिंह के चाचा सरदार अजीतसिंह, ला० पिंडीदास, अम्बाप्रसाद सूफी
तथा अन्य अनेक हिन्दू, सिख, मुस्लिम क्रान्तिकारी अपने संगठन को दृढ़ करने में लगे
हुए थे । पंजाब की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि बंगाल की भाँति पंजाब में
क्रान्तिकारी आन्दोलन केवल मध्यमवर्ग तक ही सीमित नहीं था और न आतंकवाद
तक ही उसकी परिधि समाप्त हो जाती थी । इसके विपरीत सरदार अजीतसिंह
इत्यादि वहाँ किसानो का आन्दोलन चला रहे थे और हजारों किसान उनके प्रभाव
में आ चुके थे । सन् 1907 की पंजाब के क्रान्तिकारियों में से सरदार अजीतसिंह,
अम्बाप्रसाद सूफी, ठाकुरदास इत्यादि गोपनीय रूप से विदेश जाने में सफल हो गए ।
सम्भव है अमेरिका सरकार की समिति ने इसी आधार पर गदर पार्टी की स्थापना
का यह विवरण दिया है ।
समिति की रिपोर्ट यह भी बताती है कि 1917 तक तो गदर पार्टी का संग-
ठन सर्वथा अनौपचारिक था । रिपोर्ट के अनुसार विधिवत् संगठन 22 जनवरी,
1917 को हुआ । इससे लगभग दस महीने पूर्व अर्थात् 31 मार्च, 1916 को गदर