बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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सावधानी बरतने को तैयार नहीं होते थे।
"इसी मंडली में एक श्री छोटेलाल जैन भी थे, जो हार्डिज्ज बम केस में
अभियुक्त बनाये गए किन्तु प्रमाणाभाव से छूट गए और फिर क्रान्तिकारी कार्यों
में संलग्न हो गए। इसके पश्चात् गांधीजी के तत्वज्ञान ने उनको खींचा और
साबरमती आश्रम में जाकर रहने लगे।"
"किन्तु इस मंडली के रत्न तो प्रतापसिंहजी थे, जो शचीन्द्र बाबू के साथ
बनारस षड्यन्त्र केस के अभियुक्त थे।" श्री रामनारायण चौधरी ने अपनी
इसी पुस्तक में एक स्थान पर लिखा है, "सच तो यह है कि महात्मा गांधी को
छोड़कर और किसी पर मेरी इतनी श्रद्धा नही हुई जितनी प्रतापजी पर··।"
सर रेजिनल्ड क्रेडक की हत्या का प्रयास
श्री शचीन्द्र ने अपनी इस पुस्तक के द्वितीय भाग में 'काशी अंचल की कहानी'
परिच्छेद (2) के अन्तर्गत लिखा है, "राजपूताना के एक युवक के साथ दिल्ली
आ पहुँचा। अपने दल के ही एक युवक के डेरे पर अतिथि हुआ।···उस समय के
होम मेम्बर सर रेजिनल्ड क्रैडक साहब तब दिल्ली मे न थे, और एक-दो और
कारण थे, जिससे दिल्ली में कुछ किया नही गया।"
श्री रामनारायण चौधरी ने भी अपनी पुस्तक में इस घटना का ब्यौरा दिया
है। वे लिखते हैं, "1915 का साल शुरू हुआ था कि एक दिन अँधेरे-अँधेरे
छोटेलालजी एक ऐनकधारी युवक को लेकर आए। छोटी-छोटी आँखें, साँवला
रंग और ठिगना क़द था। उन दिनों हिन्दुस्तानी फ़ौज मे गदर की तैयारी की
जा रही थी। इसके संयोजक बाबू रासबिहारी बोस थे। उनका केन्द्र बनारस था।
एक खास काम के लिए उन्होंने श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल को दिल्ली भेजा था।
प्रतापसिंह उनके साथ थे। इसी खास काम मे एक सन्देश ले जानेवाले की ज़रूरत
थी। छोटेलालजी की सलाह से प्रतापजी ने मुझे पसन्द किया। दूसरे ही दिन
प्रतापजी और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बाहर के एक पुराने मकान की
पहली मंज़िल पर पहुँचे तो एक गठीले जवान ने हमारा स्वागत किया। वह
शचीन्द्र थे। एक कोठरी मे अखबार बिछे थे। यही उनका बिस्तर था। शाम
तक मुझे योजना का पता लग गया। वह यह थी कि भारत सरकार के होम मेम्बर
सर रेजिनल्ड क्रैडक को गोली का निशाना बनाया जाय। यह काम करें जयचन्द
और मैं उन्हें हरिद्वार से बुला लाऊँ। संकेत यह था कि जैसे ही क्रैडक साहब
वाली घटना के समाचार प्रकाशित हों, मेरठ वग़ैरह की भारतीय सेना विद्रोह कर
दे।···अस्तु, मैं रात की गाड़ी से हरिद्वार के लिए चल पड़ा। भारत रक्षा क़ानून
का शिकंजा इतना कड़ा था कि हर जगह पुलिस किसी युवक को देखते ही संदेह
करती और उसे पूछताछ किये बिना आगे न बढ़ने देती। लेकिन मेरी मारवाड़ी
भेष-भाषा ने अच्छा काम दिया। हरिद्वार में उन दिनो कुम्भ का मेला था, परन्तु
काली कमली वाले बाबा का स्थान ढूंढने में विशेष अड़चन नहीं हुई। हमारे