बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
पृष्ठ 37, कुल 408 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्रान्तिकारी शचीन्द्र सान्याल का आत्म-चरित / 35-
क्रान्तिकारी का अन्तिम संस्कार हुआ, जो बर्लिन कमेटी में भी था, रूस की भी
जिसने यात्रा की थी और विप्लववादियों के इतिहास के एक अध्याय का जो
निर्माता था ।”
कितने व्यक्तियों को इस बात का पता है कि श्री रासबिहारी बोस ने
जापानी भाषा में सोलह ग्रन्थ लिखे हैं, जिनमें पन्द्रह अब भी उपलब्ध हैं ? हमें
यह बात खेदपूर्वक कहनी पडती है कि हमारे शासकों ने—हम लोगों ने—इस
विषय की ओर यथोचित ध्यान नही दिया। पर अब वक्त आ गया है कि हम
लोग अपनी नीति पर पुनर्विचार कर लें। स्वार्थ की दृष्टि से भी हमारे लिए यह
आवश्यक है कि हम विप्लववादियों के ऋण को स्वीकार करें और उनकी कीर्ति-
रक्षा के लिए प्रयत्न भी करे। ईमानदारी का भी यही तकाज़ा है।
आयरलैंड का उदाहरण अनुकरणीय
आयरलैंड ने अपने शहीदों के लिए जो कुछ किया है क्या उस तरह का कार्य
हम लोग अपने देश मे नही कर सकते ? श्रीयुत चमनलाल पत्रकार ने डबलिन-
स्थित शहीदो के अजायबघर का वृत्तान्त नवम्बर सन् 1939 के 'विप्लव' मे
लिखा था। उनके शब्द सुन लीजिए—"आयरलैंड के राष्ट्रीय वीरो का यह
स्मारक आयरलैंड की पार्लमिण्ट के विशाल भवन मे कायम है। इस अजायबघर
मे मुल्क की आज़ादी की लडाई मे भाग लेनेवाले वीरो और उस युद्ध की घटनाओं
की स्मृतियो का एक बहुत प्रभावशाली सग्रह है। इसमे उन वीरो की आदमकद
मूर्तियां है, वे वर्दियां हैं, जिन्हें पहनकर उन्होने अपनी लड़ाइयाँ लडीं । उनके
हथियार हैं, चिह्न, बैज, झण्डे इत्यादि भी है। उनकी लिखी पुस्तके, उनके
व्याख्यान, ऐलान तथा पत्र इत्यादिः खूब सुरक्षित ढंग से रखे हुए है। आयरलैंड
के स्त्री-पुरुष, वृद्ध और बच्चे वहाँ पहुँचकर और उन स्मृति-चिह्नों को देखकर
राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ते हैं। जिन जनरल राजर्म केसमेट को अंग्रेजो ने फांसी दी
थी, उनके जीवन की सम्पूर्ण गाथा आपको यहाँ देखने को मिलेगी। प्रथम महा-
युद्ध मे उन्होने जर्मनी की सहायता से एक आयरिश सेना तैयार की थी और
जहाज द्वारा वह आ ही रहे थे कि जहाज अंग्रेजो के हाथ पड गया। केसमेट को
फाँसी हुई पर राष्ट्रीय अजायबघर मे वह अब भी जिन्दा है।
‘कीर्तिर्यस्य स जीवति ।’
इस अजायबघर मे आयरलैण्ड के प्रसिद्ध शहीद टेरेंस मॅकस्विनी का भी
चित्र मिलेगा, जिन्होने 74 दिन का अनशन करके अपने प्राण दिए थे। जनरल
माइकेल कोलिन्स की भी मूर्ति विद्यमान है। हैरी बोलैण्ड सुप्रसिद्ध बीर सेनापति
डी० वेलेरा के सेक्रेटरी थे। एक सकट के समय वह अपने जूते के तले मे छिपा
कर एक पत्र डी० वेलेरा के लिए ले गए थे। वह मार डाले गए; पर उनका वह
जूता अब भी सुरक्षित है। इस सग्रहालय मे आपको वीर बालक केवनबेरी का
वृत्तान्त मिलेगा, जिसे फांसी दी गई थी। उसकी उम्र 18 वर्ष की थी। कही