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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 369, कुल 408 में से

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पृष्ठ 369

हार्डिंग्ज बम काण्ड
'बन्दी जीवन का कहानी 'दिल्ली षड्यन्त्र केस' के पश्चात् से प्रारम्भ होती
है। वास्तव मे इस षड्यन्त्र केस के साथ ही उत्तर भारत के क्रान्तिकारी आन्दो-
लन का एक अध्याय समाप्त होता है और अगला अध्याय प्रारम्भ होता है। यह
षड्यन्त्र केस उन लोगों पर चलाया गया था, जो 23 दिसम्बर, 1912 को लार्ड
हार्डिंग्ज पर बम फेकने के अपराधी समझे गए थे। लार्ड हार्डिंग्ज पर जिस समय
बम फेका गया, उस समय वह कलकत्ते से दिल्ली राजधानी लाए जाने के उपलक्ष
मे निकाले गए अपने शाही जुलूस मे एक हाथी पर आसीन थे। सन् 1905 में
बगाल के स्वदेशी आन्दोलन के समय कलकत्ता तथा बगाल मे जिस प्रकार विप्लव-
कारों सक्रिय हो उठे थे, उसी से आतंकित होकर ब्रिटिश सरकार भारत की
राजधानी कलकत्ता से हटाकर दिल्ली लाई थी। इससे पूर्व सन् 1911 मे, जार्ज
पंचम ने दिल्ली दरबार किया था और उमी मे बंग-भग को रद्द करने की घोषणा
की गई थी। उसके पश्चात् ही दिल्ली को राजधानी बनाने और इस अवसर पर
ऐसी धूमधाम और प्रदर्शन करने का आयोजन किया गया, जिससे भारतीय जनता
और विदेशो के लोकमत पर यह प्रभाव डाला जा सके कि भारतीय जनता पूर्णतया
अग्रेजी शासन की भक्त है और कही कुछ गड़बड़ नहीं है। किन्तु भारतीय क्रान्ति-
कारियो ने जिनमे श्री रासबिहारी बोस भी थे, लार्ड हार्डिंग्ज पर बम फेंककर
सरकार की इस योजना पर पानी फेर दिया। बताया जाता है कि श्री रासबिहारी
बोस के एक साथी श्री बसन्तकुमार विश्वास स्त्री-वेश में एक ऐसे मकान की छत पर
जा बैठे, जो जुलूस के रास्ते मे था। जैसे ही वायसराय का हाथी उस मकान के नीचे
आया, श्री विश्वास ने बम फेंक दिया। किन्तु वायसराय बच गए, केवल उनका
एक अंगरक्षक मारा गया। इसके पश्चात् ही बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं।
कुछ लोग मुखबिर हो गए और श्री बालमुकुन्द, मास्टर अमोचन्द, अवधविहारी
और बसन्तकुमार विश्वास को फांसी हुई। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक व्यक्तियों
को लम्बी-लम्बी अवधि की सजा सुनाई गई।