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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 408 में से

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पृष्ठ 368

'बन्दी जीवन' के यह तीनो भाग उस समय लिखे गए, जब हमारे देश मे ब्रिटिश
शासन-तन्त्र था । लेखक का उद्देश्य यह था कि भारत की स्वाधीनता के लिए उसने और उसके
साथियो ने सशस्त्र क्रान्ति का जो प्रयास किया था, उसका विवरण जनता के सम्मुख उपस्थित
कर दे, जिससे प्रेरित होकर अन्य भारतीय युवक भी इन प्रयासो मे सहायता दे और इस प्रकार
स्वाधीनता आन्दोलन शक्तिशाली बन सके ।
किन्तु उस समय सभी घटनाओ को सर्वथा स्पष्ट रूप से नही लिखा जा सकता था,
क्योकि इससे अनेक व्यक्तियो के आपत्तिग्रस्त हो जाने का भय था इसीलिए श्री शचीन्द्र बाबू
को अनेक घटनाएँ छिपानी पडी हैं और अनेक व्यक्तियो के कृत्रिम नाम लिखने पडे हैं।
भारत की स्वाधीनता के पश्चात् हमारे देश के अन्य क्रान्तिकारी महानुभावो ने जो-जो सस्मरण,
इतिहास आदि लिखे हैं, उनके सन्मुख यह बाधा नही थी । उन्होने सभी कुछ स्पष्ट रूप से
लिखा है और इसीलिए आज वे अनेक तथ्य भी प्रकाश मे आ गए है जिनको शचीन्द्र बाबू
अपने इस ग्रन्थ मे प्रकट नही कर सकते । यहाँ हम कुछ ऐसे ही तथ्य सग्रहीत करके द रहे है।