सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 354

352 / बन्दी जीवन
इनका नाम था श्री यतीन्द्रनाथ दास। यह ही युवक बाद को सरदार भगतसिंह
के साथ लाहौर षड्यन्त्र के मामले में गिरफ्तार हुआ था और यही भारतवर्ष का
सबसे पहला व्यक्ति था जिसने भूख हड़ताल करके राजनैतिक बन्दियों की मांग
पूरी कराने में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। प्रधान रूप से इन्हीं बलिदान के
परिणामस्वरूप भारतवर्ष में राजनैतिक बन्दियों के साथ विशेष करके क्रान्ति-
कारी आन्दोलन के सम्पर्क में कैद किए गए व्यक्तियों के साथ ब्रिटिश भारत के
जेलों में अच्छा बर्ताव होने लगा था। आज इस पुरानी बात का स्मरण करते
समय मुझे ऐसी इलाघा का अनुभव होता है कि मैंने उस दिन किसी आदमी को
ठीक-ठीक पहचाना था। राह चलते हुए जिस युवक के प्रति कोई एकाएक आकृष्ट
हो गया हो और वही युवक बाद को यतीन्द्रनाथदास हुआ हो इस बात से किसे
इलाघा का अनुभव न होगा ?
अर्थ-संग्रह करने के काम के लिए मुझे कुछ अस्त्रों की आवश्यकता थी।
युक्तप्रान्त और पंजाब मे मेरे पास कुछ अस्त्र थे लेकिन मैं उन्हें बंगाल मे नही
मँगाना चाहता था। इधर अनुशीलन समिति के नेतागण मुझे अस्त्र-शस्त्र की
सहायता देने के इच्छुक न थे। मैंने देखा कि अनुशीलन समिति के नेताओं से मेरी
पट नहीं रही है। अनुशीलन समिति के नेताओ ने भी देखा कि मैं भी अपनी नीति
से हटनेवाला व्यक्ति नही हूँ। अन्ततः ऐसा ठहरा कि मैं दो-एक महीने तक और
ठहर जाऊँ और अपनी नीति को कार्यरूप में परिणत न करूँ। इस बीच में वे
लोग जाली नोट बनाने का काम करेंगे क्योकि उन्हें आशा है कि उन्हें इस काम
में सफलता प्राप्त होगी। इस प्रस्ताव के अनुसार थोड़े दिनों के लिए शान्त
रहना मैंने स्वीकार कर लिया। लेकिन मैं यह अच्छी तरह से जानता था कि नोट
बनाने के कार्य में वे सफल नहीं होंगे। अब तक दो-तीन नोट मेरे पास आए परन्तु
वे बहुत ही खराब थे, वे नोट बाज़ार में चल नही सकते थे। मैंने शान्त रहना
तो स्वीकार कर लिया लेकिन अपने कार्य की तैयारी स्थगित नही की। जिस
मिल में डाका डालना था वहाँ की स्थिति को पूर्ण रूप से समझने के लिए मैंने
अपने आदमी भेजे एवं उनकी रिपोर्टों की जाँच करने के लिए मैं स्वयं उन स्थानों
पर गया। किस रास्ते से जाना है, कैसे लौटना है, किन मोकों पर किराए के
मकान लेना है, डकैती के बाद किस मौके पर अपने अस्त्र-शस्त्रादि को छोड़ देना
है, कहाँ पर मोटरकार जा सकती है, और कहाँ पर रुपयों को लाकर रखना है,
इन सब कामों के लिए कितने व्यक्तियों की आवश्यकता है, किस मिल में कितना
रुपया मिल सकता है, पंजाब अथवा बम्बई मेल को किस स्थान पर रोका जाएगा,
फिर वहाँ से कैसे हम लोग छापा मारने के बाद भागेंगे, इन सब बातों की जाँच
हुई और प्रबन्ध होने लगा।
इधर मुझे सन्तुष्ट करने के लिए एव मेरी नीति और अनुशीलन समिति के
दूसरे नेताओं की नीतियों में समझौता कराने के लिए एक मीटिंग हुई। बहरमपुर
बंगाल का एक प्रसिद्ध जिला है। मुसलमानों के समय में यह जिला मुर्शिदाबाद