बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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लाभ की है बाबू श्रीशचन्द्र घोष इसी से सम्बन्धित दल के बचे-बचाए क्रान्तिकारी
थे। अलीपुर बम षड्यन्त्र केस सन् 1908 मे चला था। इसके बाद श्री मोतीलाल
राय और श्री श्रीशचन्द्र घोष ने इस दल के काम को जारी रक्खा था। श्री रास-
बिहारी बोस, जो आजकल जापान मे बस गए है और भारत में आने से जिन्हें
आज भी फांसी के तख्ते पर लटकना पडेगा, श्री श्रीशचन्द्र घोष के आत्मीय हैं,
गत महायुद्ध के समय श्रीश बाबू को लगातार कई वर्षों तक जेल में नजरबन्द
रहना पड़ा था। लडाई के अन्त मे जब दूसरे सब नजरबन्द छोड़ दिये गए थे
उसी अवसर पर श्रीश बाबू ने भी मुक्ति पाई थी। मुक्ति पाने के पहले श्रीश
बाबू ने पुलिस वालों की कुछ शर्तों को स्वीकार कर लिया था। श्रीश बाबू ने यह
स्वीकार कर लिया था कि भविष्य मे वे फिर किसी क्रान्तिकारी आन्दोलन मे
भाग नही लेंगे।
अण्डमन से लौटने के बाद श्रीश बाबू से मेरी बातचीत हो चुकी थी इसका
उल्लेख मै पहले ही कर चुका हूँ। मेरे मन में यह डर था कि शायद मुझे सहायता
देने मे उन्हें कुछ हिचकिचाहट हो। लेकिन फरार हालत मे चन्द्रनगर मे भेट होने
पर मुझे सहायता देने मे वे सहर्ष आगे बढे।
श्रीश बाबू अविवाहित थे। परन्तु उनके घर मे उनकी भावज, उनकी मौसी
इत्यादि स्त्रियाँ थी। अपने बाल-बच्चो को साथ लेकर मैं फरार हुआ था, यह
देखकर श्रीश बाबू घबडाए नही। बडी प्रसन्नता एव संयमपूर्ण आवेश के साथ
मेरे बाल-बच्चो को उन्होने स्त्रियों के पास भिजवा दिया। दरिया मे तैरते-तैरते
जब थके हुए मनुष्य का पैर किसी ठोस वस्तु को स्पर्श करता है उस समय उसकी
जो अनुभूति होती है अपने बाल-बच्चो को श्रीश बाबू के घर की स्त्रियो के पास
भेजकर मुझे भी वैसी ही तसल्ली हुई। बच्चो को दूध और मुझे साँस लेने का
समय मिला।
चन्द्रनगर कहने के लिए फ्रांसीसी है परन्तु यहाँ के गवर्नर को ब्रिटिश सरकार
अपने वश मे रखती है। तथापि क्रान्तिकारियों के लिए यहाँ कुछ सुविधा अवश्य
मिल जाती है। ब्रिटिश पुलिस सीधे आकर यहाँ पर धरपकड नही कर सकती।
फ्रांसीसी पुलिस की सहायता लिए बिना वह कुछ नहीं कर सकती। ब्रिटिश सर-
कार के गुप्तचर चन्द्रनगर में भी धड़ल्ले से घूमते हैं लेकिन किसी को गिरफ्तार
करने के लिए उन्हें फ्रांसीसी कोतवाली में जाना पड़ता है। इतने में क्रान्ति-
कारियों को अवसर मिल जाता है। ब्रिटिश सरकार के दबाव से चन्द्रनगर में भी
ये नियम बन गए हैं कि किसी भी परिवार में आगन्तुक के आने पर उन्हें थाने पर
सूचना देनी पड़ेगी। इसी प्रकार मकानदारों को भी नवागत के बारे में पुलिस
को सूचित करना पडेगा। ये सब बातें मुझे मालूम थीं। श्रीश बाबू ने मुझसे ये
सब बातें दोहराईं। अभी तक ब्रिटिश सरकार की तरफ से मुझ पर कोई अभियोग
नहीं लगा था। इसलिए सब बातें सोचकर मैंने निश्चय किया कि पुलिस को यदि
सूचना मिल भी जाय तो कोई हानि नहीं। मैं चन्द्रनगर में ही रहूँगा। पुलिस को