बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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फिर बंगाल में
मिर्जापुर पहुँचकर मैंने चन्द्रनगर मे श्री नरेन्द्रनाथ बनर्जी के पास एक तार
भेज दिया । मेरे आने की सूचना उनको थी । केवल इतना ही वे नहीं जानते
थे कि कब और किस दिन मैं उनके पास पहुँचूँगा । यदि मैं इलाहाबाद से तार
भेजता तो संभव था कि पुलिस की दृष्ट आकर्षित हो जाती । मिर्जापुर स्टेशन
से यदि कोई पथिक तार करे तो पुलिस की दृष्टि आकर्षित होने की सबसे
कम संभावना थी। लेकिन 'जहाँ कबीर माठा का जाएँ, पडिया भेंस दोनो मर
जाएँ' मैने सोचा था कुछ, हो गया कुछ और । लोग भाग्य को मानते नही । परन्तु
यह बहुधा देखा गया है कि हजारों प्रयत्न करने पर भी किसी मनुष्य के लिए
कभी भी सरल रूप मे शुभ परिणाम नहीं निकलते । मैं उन अभागों मे से एक था
और अब भी मेरे अदृष्ट मे कुछ अन्तर हुआ है ऐसा नही मालूम पड़ता । रास्ते
मे तो कोई विपत्ति नहीं आई। लेकिन चन्द्रनगर पहुँचकर मेरी विडम्बना की
सीमा न थी । मेरा टिकट तो कलकत्ते तक का था । इसका भी कुछ रहस्य था ।
चन्द्रनगर मे हमारी गाड़ी बहुत थोड़ी देर रुकी । मेरे पास सामान यथेष्ठ था ।
चन्द्रनगर के स्टेशन पर मै बहुत उदग्रीव होकर देख रहा था कि नरेन्द्रनाथ आए
हैं या नहीं। नरेन्द्रनाथ को स्टेशन पर न देखकर मेरी उत्कण्ठा की सीमा न रही ।
परन्तु मुझे उतरना तो था ही। सहयात्रियों की सहायता से मैंने अपना सामान
उतार लिया और प्लेटफार्म पर असहाय की तरह इधर-उधर देखता और सोचता
रहा कि किसका सहारा लूं । घर-बार छोड़कर आया हूँ रहने का ठिकाना नहीं ।
नरेन्द्रनाथ जी का पता नही । इन्हीं के यहाँ ठहरने की बात थी । पहले से तय था
इन्हीं के मकान पर ठहरूँगा और सहायता के रूप मे मासिक कुछ दे दिया करूँगा ।
इनका मकान मैंने पहले से देख लिया था। कुलियों से सामान उठवा रहा था
और संदेहाकुल नयनों से इधर-उधर ताक रहा था । मन में भय था कहीं पुलिस-
वालों की दृष्टि मेरी ओर आकर्षित न हो जाय । इतने में स्टेशन से सब यात्री
चले गए थे, केवल दो-तीन व्यक्ति किसी के इन्तज़ार में प्लेटफार्म पर ठहर गए
थे, यह मेरी तरफ आए । मैं भी उनकी तरफ आगे बढ़ा । उन्होंने पूछा आप कहाँ
से आ रहे हैं, कहाँ जाएँगे । मैने उन्हें बताया कि मैं अपने एक मित्र श्री नरेन्द्रनाथ
बनर्जी के यहाँ जा रहा हूँ । उनके मुहल्ले का नाम बताया, पूछे जाने पर मैंने