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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 336, कुल 408 में से

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पृष्ठ 336

334 / बन्दी जीवन
अज्ञात कुलशील युवक का पीछा करने मे सरकार ने हज़ार रुपए खर्च कर दिए
ऐसे दृष्टान्त बहुत हैं। क्रान्तिकारियों की सबसे बडी कमी यह थी कि वे अपने
प्रयत्नों में असफल रहे, नही तो आज उनके छिद्रान्वेषीगण लज्जावन्त मुख होकर
नीरव बैठे रहते । आज भी हमारे देशवासीं स्वतन्त्रता के प्रेमी नही बने है। आज
भी उनमें वह तीव्र अभिलाषा उत्पन्न नही हुई है जिसके कारण भारत की
स्वाधीनता-प्राप्ति के लिए वे अधीर हो जाते । अस्तु, मै प्रसन्नचित्त होकर दुर्दम-
नीय अभिलाषा के साथ द्विधाहीन होकर, विप्लव कार्य मे आगे बढ चला ।