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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 325, कुल 408 में से

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पृष्ठ 325

अनुशीलन समिति का सहयोग / 323
षड्यन्त्र के मामले में मैं भी गिरफ्तार होन वाला था यह भी मैं बता चुका हूँ ।
कानपुर में वोलशेविक केस चलने के पहले ही युक्तप्रान्त के एक मॉडरेट नेता ने
मुझे यह सूचना दे दी थी कि सम्भव है मैं भी इस मामले में गिरफ्तार हो जाऊँ ।
उस समय मैं बड़ी सावधानी से घूमता-फिरता था। अब तक मैं युक्तप्रान्त और
पंजाब में क्रान्तिकारी आन्दोलन की नींव डाल चुका था। युक्तप्रान्त के प्रायः
सभी बड़े शहरों में हम लोगों का संगठन हो चुका था। पंजाब में अच्छे कार्यकर्ता
मिल चुके थे । युक्तप्रान्त और पंजाब में भी मुझे क़रीब-क़रीब फ़रार हालत में
ही घूमना पड़ता था। मैं यह बहुत चाहता था कि मुझे एक अनुभवी कार्यकर्ता
मिल जाय तो मैं अपना घूमना-फिरना बन्द कर दूं। योगेशबाबू के मिलने पर
मुझे यह सन्तोष हो गया कि अब मैं एक स्थान पर निश्चित होकर जम सकता
हूँ और उस स्थान से बैठे-बैठे समस्त क्रान्तिकारी आन्दोलन का नियन्त्रण कर
सकता हूँ ।
देहली में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन के बाद बंगाल में रेगुलेशन 3 के अन्त-
र्गत बहुत-से क्रान्तिकारी नेता बेकार होने लगे थे। इनमें पूर्वोक्त श्री सत्येन्द्रचन्द्र
मित्र एवं श्री सुभाषचन्द्र बोस भी थे । मैं इसके पहले से ही कुछ सावधान-सा हो
गया था। बंगाल की गिरफ्तारियों के बाद मैंने यह निश्चय कर लिया कि अब
मुझे बाकायदा फरार होना पड़ेगा वर्ना बच न सकूँगा ।