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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 311, कुल 408 में से

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पृष्ठ 311

क्रान्तिकारी दल और कम्यूनिस्ट / 309
प्रान्तीय संगठन
साधारणतया प्रत्येक प्रान्त में दल के पांच विभागों के पांच प्रतिनिधियों को
लेकर एक कार्यकारिणी समिति बनेगी। प्रान्त के समस्त कार्य इस समिति के
नियन्त्रण में होंगे। इस समिति के समस्त निर्णय सर्व सम्मति से निश्चित होगे।
दल के पांच विभाग

  1. प्रचार कार्य, 2. लोक संग्रह, 3. अर्थ संग्रह एव आतंकवाद, 4. अस्त्र-
    शस्त्र का संग्रह एवं उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना, 5. विदेशों से
    सम्बन्ध स्थापित करना।
  2. प्रचार कार्य—(क) प्रकाश्य एवं गुप्त मुद्रित पत्रों की सहायता से, (ख)
    व्यक्तिगत वार्तालाप की सहायता से, (ग) सार्वजनिक सभा इत्यादि द्वारा, (घ)
    कथा वार्ता अर्थात् धर्मविषयक व्याख्यानों द्वारा सुनियन्त्रित रूप से अपने उद्देश्य
    का प्रचार करना, और (ङ) मैजिक लैण्टर्न द्वारा।
  3. लोक संग्रह का काम जिलों के भार प्राप्त संचालक द्वारा होगा।
  4. साधारणतया स्वेच्छाकृत दान की सहायता से अर्थ-संग्रह किया जायगा
    परन्तु समय-समय पर बल प्रयोग द्वारा भी। विदेशी सरकार से अत्यन्त उत्पीड़ित
    होने पर इस दल का कर्त्तव्य होगा कि वह उसका उचित रूप से प्रतिशोध ले।
  5. इस दल के प्रत्येक सदस्य के पास शस्त्र पहुँचाने का भरसक प्रयत्न किया
    जाएगा परन्तु ये सब शस्त्र विभिन्न केन्द्रों में सुरक्षित रखे जाएँगे एवं प्रान्तीय
    कमेटी के नियन्त्रण में ही उनसे काम लिया जाएगा। इस विभाग के अधिनायक
    अथवा जिला संगठन कर्ता की बिना अनुमति एव बिना जानकारी के कोई भी
    अस्त्र इधर से उधर नही किया जाएगा।
  6. विदेशी विभाग—इस विभाग के समस्त कार्य केन्द्रीय समिति के ही
    नियन्त्रण एवं संचालन में होंगे।
    जिलों के संचालक और उनका कर्तव्य
    जिलों के सदस्यों का भार पूर्ण रूप से जिला आर्गेनाइजर पर रहेगा। अपने
    जिले के प्रत्येक अंश में जिला-संचालक इस दल की शाखाएँ स्थापित करने की
    यथाशक्ति चेष्टा करेगा। सफलतापूर्वक लोक-संग्रह के कार्य के लिए प्रत्येक
    संचालक अपने जिले के विभिन्न सार्वजनिक कार्यों एवं संस्थाओं के साथ घनिष्ठ
    रूप से सम्पर्क रखेगा। जिलों के संचालक गण सब प्रकार से प्रान्तीय कमेटी के
    अधीन रहकर काम करेंगे। प्रान्तीय कमेटी उनके सब कार्यों पर नियन्त्रण रखेगी
    एवं इस समिति के संचालन में ही जिलों के ये संचालकगण काम करेंगे। जिले
    के संचालक अपने सदस्यों को छोटी-छोटी टोलियों में विभाजित कर देंगे एवं इस
    बात पर ध्यान रखेंगे कि ये सब विभिन्न टोलियां एक-दूसरे से परिचित नहीं
    रहेंगी। जहाँ तक सम्भव हो सके एक प्रान्त के विभिन्न जिला संचालकगण भी