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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 408 में से

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पृष्ठ 310

308 / बन्दी जीवन
कार्यक्रम का एक विशेष महत्त्व है। यह कार्यक्रम आज पुलिस के अधिकार में है।
लेकिन काकोरी षड्यन्त्र के मामले के फैसले में इस कार्यक्रम का बहुत-सा अंश
उद्धृत है।
उन उद्धृत अंशों से उस कार्यक्रम का कुछ परिचय इस स्थान पर देने का
प्रयत्न करूँगा। इस कार्यक्रम से पाठकों को विदित होगा कि उत्तर भारत का
क्रान्तिकारी आन्दोलन कितने दृढ़ सिद्धान्तों के आधार पर प्रारम्भ हुआ था।
श्री रासबिहारी के समय उत्तर भारत में जो क्रान्तिकारी दल काम कर रहा
था उसका कोई कार्यक्रम न था। यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा में जो विप्लव
दल था वह गदर पार्टी के नाम से विख्यात था। बंगाल में जितनी पार्टियाँ थीं
उन सब के अलग-अलग नाम थे। अबकी बार मैंने जो दल संगठित किया उसका
नाम 'दि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' रक्खा। अवध चीफ कोर्ट के फैसले
से इस दल के लक्ष्य तथा साधन एवं इसकी संगठन प्रणाली के नियम इत्यादि
नीचे उद्धृत हैं -
नाम
इस दल का नाम 'दि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' रहेगा।
लक्ष्य
सुसंगठित एवं सशस्त्र क्रान्ति के द्वारा संयुक्त भारतीय प्रजातन्त्र संघ की
स्थापना करना इस दल का ध्येय होगा। इस प्रजातन्त्र के विधान और उसके
अन्तिम स्वरूप का निर्माण एवं उसकी घोषणा जनता के प्रतिनिधियों द्वारा ऐसे
समय की जायगी जब वे अपने निश्चयों को व्यावहारिक रूप देने में समर्थ होंगे।
सार्वजनीक मताधिकार की नींव पर इस प्रजातन्त्र संघ का संगठन होगा। इस
प्रजातन्त्र संघ में उन सब व्यवस्थाओं का अन्त कर दिया जायगा जिनसे किसी
एक मनुष्य द्वारा दूसरे का शोषण हो सकने का अवसर मिल सकता है।
विधान
संचालक समिति—इस दल के समस्त कार्य केन्द्रीय समिति द्वारा संचालित
होंगे। इस केन्द्रीय समिति में भारत के प्रत्येक प्रान्त के प्रतिनिधि रहेंगे। केन्द्रीय
समिति के सभी निश्चय सब सदस्यों की स्वीकृति से होंगे। केन्द्रीय समिति के
हाथ में अखंड अधिकार रहेंगे। विभिन्न प्रान्तों के समस्त कार्यों की जानकारी
इस समिति को रहेगी। विभिन्न प्रान्तों के कार्यों को समलक्ष्यीभूत करके अपने
उद्देश्य साधन में उन्हें परस्पर सम्बद्ध करना और उन पर नियन्त्रण रखना इस
केन्द्रीय समिति का मुख्य कार्य होगा। भारत के बाहर विदेशों में जो कुछ किया
जाएगा वह केन्द्रीय समिति के ही तत्त्वावधान में होगा .