बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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उक्त ध्येय को बदलने के लिए लगा दी । बहुत वोटों से महात्माजी इसके विरुद्ध
जीत गए । लेकिन अन्त तक कम-से-कम कहने के लिए तो कांग्रेस के ध्येय में
परिवर्तन हो ही गया तो क्या यह कहना नितान्त भूल है कि कांग्रेस आन्दोलन पर
विप्लव आन्दोलन का यथेष्ठ प्रभाव पड़ा है ?
मिर्जापुर के बैरिस्टर श्री यूसुफ इमामजी तथा बुन्देलखण्ड के विशिष्ट व्यक्ति
दीवान शत्रुघ्नसिंहजी से हम लोगों की बातें हुईं । हम लोगों ने एक-दूसरे को
अच्छी तरह से समझ लिया । लेकिन विशेष दुःख की बात है कि मेरी अनुपस्थिति
मे इन लोगों से किसी ने कुछ काम नही लिया । आज भी सांप्रदायिकता की
लहर में यूसुफ इमाम साहब पूर्ण राष्ट्रीयतावादी हैं । दीवान शत्रुघ्नसिंहजी एवं
यूसुफ इमाम साहब दोनों ने ही कांग्रेस आन्दोलन में पूर्णरीति से भाग लिया ।
आज भी सच्चे देशभक्तों की भाँति ये दोनों सज्जन राष्ट्रीय क्षेत्र में काम कर रहे
हैं ।
भारत के विप्लव आन्दोलन के लिए यह विशेष दुःख की बात थी कि विप्लव
आन्दोलन के नेताओं को प्रकाश्य आन्दोलन में भाग लेने का अवसर नही प्राप्त
हुआ । यह भी एक कारण है जिसके लिए भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन पर विप्लव
आन्दोलन का जितना प्रभाव पडना चाहिए था उतना नही पड़ा । इसलिए
अण्डमन से मुक्त होने पर मेरी इच्छा थी कि मैं भी प्रकाश्य आन्दोलन में भाग
लूँ । देहली मे कांग्रेस के विशेष अधिवेशन के समय मैने देशवासियो के प्रति
एक अपील निकाली थी । इस अपील में एक नया कार्यक्रम किया गया था —
भारत को पूर्ण रूप से स्वतंत्र करना है इस ध्येय पर विशेष जोर देते हुए एशिया
की विभिन्न पद-दलित जातियो का एक राष्ट्र संघ बनाने की कल्पना के अनुसार
इस अपील में कार्यक्रम दिया गया था । इसके अतिरिक्त मजदूर संगठन के बारे
में भी इस कार्यक्रम में विशेष ध्यान दिया गया था । राष्ट्रीय समस्याओं को भली
प्रकार समझने वाले चैतन्यवान त्यागी दृढ़ संकल्पयुक्त देशप्रेमियों को लेकर
स्वयंसेवकों का देशव्यापी एक विराट् दल बनाने का संकल्प भी इस कार्यक्रम
में था । इस प्रकार थोडे शब्दो में ओजस्विनी अंग्रेजी भाषा में अपने कार्यक्रम
का स्पष्ट चित्र खींचते हुए मैने यह अपील निकाली थी । प्रोफेसर जितेन्द्रलाल
बनर्जी अंग्रेजी के प्रसिद्ध शक्तिशाली लेखक है । इस अपील को पढ़कर उन्होंने
यह जानना चाहा था कि इस अपील की अंग्रेजी किसने लिखी है । मेरे साथ बंगाल
के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी नेता श्री विपिन चन्द्र गांगुली थे । उन्होने बनर्जी साहब
को मेरा नाम बताया । मैं श्री विपिन गांगुली को लेकर इस अपील पर जितेन्द्रलाल
बनर्जी के हस्ताक्षर कराने गया था । डेलीगेट की हैसियत से मैं देहली कांग्रेस
में आया था । मेरा नाम इस अपील के बिलकुल अन्त में था । जहाँ तक मुझे
स्मरण है सबसे पहले श्रीयुत विपिनचन्द्र गागुली के हस्ताक्षर थे । इस अपील में
आल इण्डिया कांग्रेस कमेटी के बहुत-से सदस्यों के हस्ताक्षर थे । इस अपील के
निकालने के साथ-साथ हम एक प्रकाश्य आन्दोलन की सृष्टि करना चाहते थे ।