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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 408 में से

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पृष्ठ 295

उत्तर भारत में दल का विस्तार / 293
क्या हम यह कह सकेंगे कि भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन पर हर्डीकरजी का उतना
प्रभाव पड़ा है जितना कि क्रान्तिकारी आन्दोलन का पड़ा है ।
हर्डीकरजी गुप्त रीति से कोई दल नही बनाना चाहते थे । उनकी इच्छा थी
कि कांग्रेस में रहते हुए और उसकी छत्रछाया में कांग्रेस की मर्यादा से लाभ
उठाते हुए कांग्रेस नेतागणों के सहयोग से एक स्वयंसेवकों का विराट् दल बनाएं ।
आज भी हर्डीकरजी उसी काम में लगे हैं। लेकिन अब तक उन्हें कोई सफलता
नहीं प्राप्त हुई ।
भारत का विप्लव आन्दोलन कांग्रेस के नेतृत्व पर कुछ भी निर्भर नहीं
रहा। इसके विपरीत कांग्रेस आन्दोलन पर ही विप्लव आन्दोलन का यथेष्ठ प्रभाव
पड़ा । दृष्टान्त रूप में यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस के ध्येय में जो परिवर्तन
हुआ इसका सबसे बड़ा श्रेय विप्लव आन्दोलन को ही है। जिस समय भारत
के संतानगण विदेशों में जा-जाकर भारत को पूर्ण रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए
जान की बाजी लगा रहे थे, जिस समय विदेशों में एक तरफ श्री एम० एन०
चटर्जी, श्री अब्दुल्ला, श्री महेन्द्र प्रताप एवं दूसरी ओर रासबिहारी बोस इत्यादि
भारतवर्ष को स्वतंत्र करने के लिए जी-जान से लगे हुए थे उस समय भारत मे
कांग्रेस के नेतागण प्रांतीय स्वराज्य लाभ करने के लिए प्रयत्न कर रहे थे । भारत
के उग्रपंथी व्यक्तियों ने बार-बार यह चेष्टा की कि भारत को पूर्ण रूप से स्वतन्त्र
करना कांग्रेस का ध्येय बन जाय लेकिन हर बार वे इसमें असफल रहे । भारत को
पूर्ण रूप से स्वतन्त्र करने के लिए कितने ही युवकों ने फांसी के तख्ते पर जीवन
बलि चढ़ा दी । साल के बाद साल गुज़रते गए। षड्यन्त्र रचे गए। ऐसा कोई मास
खाली नहीं गया जिसमे भारत के किसी-न-किसी प्रांत में राजनैतिक षड्यन्त्र के
मामले न चले । दो-दो तीन-तीन हज़ार नवयुवको को बिना उन पर किसी
प्रकार का मुकदमा चलाए पाँच-पाँच, दस-दस साल के लिए ब्रिटिश सरकार ने
जेलों मे बन्द रखा। क्या इन सब बातों का प्रभाव कांग्रेस के नेतागणों के मन पर
कुछ भी नही पड़ा ? सन् 1919 के दिसम्बर महीने में ब्रिटिश सरकार के घोषणा-
पत्र द्वारा विद्रोहियों के लिए विशेष रूप से सन्देश भेजा गया । एक ओर जैसे
भारत के शासन विधान में सुधार हुए दूसरी ओर भारत को ब्रिटिश पंजे के चंगुल
में सुरक्षित रखने के लिए रोलट कमेटी की सिडिशन रिपोर्ट के अनुसार काले
क़ानून बनाए गए। भारत के विप्लव आन्दोलन को कुचलने के लिए मुख्य रूप
से ये काले क़ानून बनाए गए थे । भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गांधी
ने सर्वप्रथम जब अपना क़दम रखा तो उन्होंने इस काले क़ानून के विरुद्ध ही
अपना आन्दोलन प्रारम्भ किया था। विप्लव आन्दोलन कुचला नहीं गया ।
महात्माजी का चलाया हुआ आन्दोलन भी बढ़ता गया । विप्लव आन्दोलन को
दबाने के लिए रोलट ऐक्ट बना । रोलट ऐक्ट .के विरुद्ध महात्मा गांधी का
सत्याग्रह आन्दोलन प्रारम्भ हुआ । पहले कांग्रेस का ध्येय प्रांतीय स्वराज्य लाभ
करना था । अहमदाबाद कांग्रेस में उग्रपंथियों ने अपनी सारी शक्ति कांग्रेस के