बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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लग गया था। लेकिन अभी भी कम्यूनिज्म का पूरा स्वरूप मेरी समझ मे नहीं
आया था। गुरुमुखसिंहजी से बातचीत करने के बाद एवं सोवियत कांस्टिट्यूशन
(शासन विधान) पढ़ने के कारण कम्यूनिज्म के बारे मे मेरी धारणा और भी
स्पष्ट हो गई। सरदार गुरुमुखसिंह की संस्था के बारे में जयचन्द्रजी से मेरी
बातचीत हुई और यह विचार किया गया कि कम्यूनिज्म के सिद्धान्त का कितना
अंश हम अपनी संस्था में ग्रहण कर सकते हैं। उस समय अध्यापक जयचन्द्रजी भी
कुछ अधिक नहीं जानते थे। इस प्रकार हम लोग कम्यूनिज्म के बारे में धीरे-धीरे
सोचने लग गए। उस समय तक बंगाल के पुराने क्रान्तिकारी श्री नरेन्द्रनाथ
भट्टाचार्य उर्फ मानवेन्द्र राय यूरोप के कम्यूनिज्म के बारे मे लेख इत्यादि भारत
में भेजा करते थे। उनके प्रकाशित 'वेङ्गाडं आफ इण्डियन इण्डिपेन्डेन्स' नामक
साप्ताहिक पत्र हम लोगों के हाथ में आए। उन पत्रों एवं पर्चों से भी कम्यूनिज्म
के बारे में हम लोग कुछ-कुछ समझने लग गए ।
अबकी बार पंजाब आकर जैसा एक तरफ रूस की साम्यवादी नीति के
संस्पर्श में आए उसी