बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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जा सकता। अंग्रेज ! तुम यदि समझते हो कि अकालियों के पीछे दूसरे भारतवासी
नहीं हैं तो तुम अत्यन्त भ्रम में हो । इस भ्रम को दूर करने के लिए ही मैंने अपने
प्राणों की बाजी लगाकर यह प्रमाणित करना चाहा कि भारतवर्ष में अकाली
अकेले नहीं हैं। श्री सी० आर० दासजी सब बातें सुनकर गम्भीर हो गए और
बाद में कहा, 'आज का दिन और रात मुझे समय दो। कल फिर मेरे साथ मिलो ।
सब बातें समझ-बूझकर कल मैं अपनी राय दूंगा।'
वायसराय के प्रश्न को छोड़कर सिक्ख नेताओं ने एक और बात मुझे बताइ
थी । इसे भी मैंने श्री सी० आर० दासजी के सामने रख दिया था । सिक्खों ने
मुझ से कहा था कि अंग्रेज की नीति यह हो रही है कि काश्मीर को किसी-न-किसी
बहाने से ब्रिटिश इण्डिया से अन्तर्भुक्त कर लिया जाय और काश्मीर को अंग्रेजों
की एक कालोनी के रूप में परिणत कर दिया जाय । अंग्रेज चाहते थे कि काश्मीर
में अधिक-से-अधिक संख्या में अंग्रेजी पल्टन रखी जाय। इसके विरुद्ध किस प्रकार
से आन्दोलन खड़ा किया जाय यह भी सिक्ख नेतागण जानना चाहते थे । मैंने
सिक्ख नेताओं से कह दिया था कि देशबन्धु सी० आर० दासजी से परामर्श किये
बिना मैं कोई काम नहीं करूँगा । वे भी यह चाहते थे कि काश्मीर का प्रश्न सी०
आर० दास के कानों तक पहुँच जाय ।
सी० आर० दासजी ने काश्मीर के प्रश्न को विशेष महत्त्व नही दिया और
इसके बारे में मुझसे कुछ कहा था या नहीं मुझे आज याद नहीं है । दूसरे दिन
नियत समय पर मैं सी० आर० दासजी के मकान पर बहुत उत्सुकता के साथ
पहुँचा । सी० आर० दासजी ने कहा 'तमाम रात मुझे नींद नही आई, तुम्हारे प्रश्न
को लेकर बहुत गम्भीरता के साथ मैने दिन और रात सोचा । लेकिन अन्त में मैं
इसी परिणाम पर पहुँचा हूँ कि अभी वायसराय के ऊपर कोई आक्रमण होना
उचित नही है । तथापि यदि मैं गिरफ्तार हो गया तो मेरी गिरफ्तारी के बाद
तुम लोग इस काम को कर सकते हो ।' मैं सब बातें समझ गया । और क्या
कहता ? लेकिन फिर भी राजनीतिक क्षेत्र में यदि काम करना है तो हरएक प्रकार
के व्यक्ति से जितना लाभ हो सके उठाना चाहिए । फिर एक तो मैं सी० आर०
दासजी से सहायता पाने की आशा कर रहा था और दूसरी बात यह थी कि अभी
हमारा संगठन थोड़े दिन का था, इसलिए मैं नही चाहता था कि अभी हम लोग
ऐसा कोई काम करें जिससे सरकार की तमाम शक्ति हमे मिटाने मे लग जाय ।
इन सब कारणों से मैंने पंजाब के नेताओं को अपनी परिस्थिति समझा दी ।
परिस्थिति के सामने उन्हें भी झुकना पड़ा ।
एक बात मुझे ठीक से याद नही है कि देशबन्धुदासजी से मैंने सहायता के
लिए जो प्रार्थना की थी वह पंजाब की बातों की आलोचना करते समय की थी
अथवा उसके बाद, मैं ठीक से नही कह सकता । जहाँ तक मुझे याद है मैं समझता
हूँ अनुशीलन समिति के साथ मेरा कोई समझौता होने के पहले ही मैंने सी०आर०
दास जी से ये सब बातें की थीं । सहायता देने के बारे में दासजी ने मुझसे कहा