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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 273, कुल 408 में से

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पृष्ठ 273

क्रान्तिकारी दल का पुनर्गठन / 271

करने के लिए कहाँ तक तैयार है। हम लोग तो उसी को अपने दल का आदमी
समझते थे जो व्यक्ति हर घड़ी इस बात के लिए तैयार हो कि जब कभी कहा
जाय तभी घर-बार छोड़कर काम करने के लिए मैदान में उतर पड़े। इस नीति
के अनुसार मैंने भगतसिंह से कहा कि "क्या तुम घर-बार छोड़ने को तैयार हो।
यदि तुम शादी कर लोगे तो आगे चलकर अधिक काम करने की आशा तुमसे
नही रहेगी। और तुम यदि घर में रहते हो तो उन्हें शादी करनी पड़ेगी। मैं नहीं
चाहता कि तुम शादी करो। इसलिए मेरी इच्छा है कि तुम घर छोड़कर मैं जहाँ
कहूँ वहाँ रहने लग जाओ।" भगतसिंह घर छोड़ने के लिए तैयार हो गए। मैंने
एक दफा चाहा था कि सरदार किशनसिंह (भगतसिंह के पिताजी) से मिल मिला
लें। क्योंकि अतीत युग में सरदार किशनसिंह से हम लोगों का कुछ सम्बन्ध रहा
था। लेकिन भगतसिंह के घर से बाहर चले जाने की बात से मैंने यह निर्णय
किया कि सरदार किशनसिंह से नहीं मिलूंगा। मुझे यह याद है कि एक दफा एक
बंगले के सदृश मकान में मैं लाहौर शहर की बाहरी तरफ सरदार किशनसिंहजी
से मिला था, किस बार मिला था मुझे इस बात का स्मरण नहीं है। मेरे कहने
पर भगतसिंहजी घर छोड़कर युक्तप्रांत चले गए थे। पहले-पहल कानपुर में
मन्नीलालजी अवस्थी के मकान पर उनके रहने का इन्तजाम किया गया था।