सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 271, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 271

क्रान्तिकारी दल का पुनर्गठन / 269
बारीन्द्र ने इस बात को प्रकाश्य रूप में स्वीकार किया है। पंजाब में भी अकाली
नेता की मनोवृत्ति को देखकर वही बंगाल की बात याद आती है। सरदार
गुरुमुखसिंह के कमरे में बैठकर यह तय हुआ कि भारत के बड़े लाट के ऊपर बम
और पिस्तौल से हमला किया जाय। उस समय सरदार गुरुमुखसिंह भी पंजाब में
बोलशेविक नीति पर एक दल के संगठन कार्य में लगे हुए थे। लेकिन उनके दल
में यह सामर्थ्य न थी कि लाट साहब के ऊपर आक्रमण का कोई इन्तजाम कर सके।
जैसा मैं पहले बता चुका हूँ मैंने युक्त प्रान्त में एक छोटा-सा दल खड़ा कर लिया
था। मैंने इन लोगों से वादा किया कि बंगाल के देशबन्धु सी० आर० दास से
सलाह करने के बाद ही मैं यह बता सकता हूँ कि लाट साहब के ऊपर हमले का
दायित्व मैं ले सकता हूँ या नही। पंजाब के नेताओं को मैंने स्पष्ट शब्दों में समझा
दिया कि हम ऐसा कोई काम करना नहीं चाहते जिससे जन-आन्दोलन को कोई
धक्का पहुँचे। महात्मा गांधी से बंगाल के कुछ क्रान्तिकारियों ने वादा किया था
कि सालभर महात्माजी के कार्य में वे लोग बाधा नहीं देंगे। मैंने अपने दिल में
यह आशा बांधी थी कि देशबन्धु सी० आर० दास और उनके ऐसे दूसरे कांग्रेसी
नेताओ को विप्लव आन्दोलन के प्रति सक्रिय रूप में आकृष्ट करूँगा। इस मनोवृत्ति
के कारण मैं यह नही चाहता था कि सी० आर० दास की इच्छा के विरुद्ध आतंक-
वाद की सृष्टि की जाय। मुझे ऐसा भी मालूम था कि अभी थोडे दिन पहले ही
सी० आर० दास में और ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि में राजनीतिक मामलों के
बारे मे कुछ समझौते की बातचीत चल रही थी। अकाली नेता एवं गुरुमुखसिंह ने
मेरे दृष्टिकोण का समर्थन किया।
कहाँ पर लाट साहब के ऊपर हमला किया जाय इस पर भी विचार हुआ।
पाठक सुनकर हैरान हो जाएँगे कि सिख आन्दोलन इतना व्यापक एवं गम्भीर हो
चुका था कि बड़े-से-बड़े सिख अफ़सर भी इस आन्दोलन को हर प्रकार से
सहायता देने के लिए तैयार हो गए थे। गुरुमुखसिंह के कमरे में जो सिख अफ़सर
मौजूद था उसने मुझसे कहा कि शिमला मे ही हमला हो सकता है। और लाट
साहब के चलने-फिरने के बारे मे एक घण्टे की खबर हमको दी जा सकती है। मैं
शिमला के बारे मे थोड़ा-बहुत परिचित था क्योकि मैं एक साल तक शिमला में
रह चुका था। मै जानता था कि शिमला से बाहर निकल जाने के लिए सैकड़ों
रास्ते है। शिमला मे मेरे आने-जाने का इन्तजाम होने लगा।
एक और विशेष महत्वपूर्ण बात यहाँ बता देना अप्रासंगिक न होगा। मुझे
एक तार की नकल दिखलाई गई। यह तार जंगी लाट की तरफ से नाभा के जंगी
अफसर के पास जा रहा था। यह तार संकेत मे लिखा हुआ था। मुझसे कहा
गया कि मैं इस तार का मर्मोद्घाटन करूँ। मैने देखा हजार की संख्या मे (एकाई-
दहाई सैकड़ा हजार ऐसे हजार की संख्या मे) कई एक अंक तीन लम्बी-लम्बी
कतारों में सजाये हुए हैं –अर्थात् मान लीजिए कि ऐसा है : पहले 4516 लिखा
हुआ है, उसके नीचे 3721 लिखा है और उसके नीचे 7528 लिखा है इसी प्रकार