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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 408 में से

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पृष्ठ 261

क्रान्तिकारी दल का पुनर्गठन
(2)
इस समय श्री रासबिहारी से मेरा पत्र-व्यवहार होता था । वे सब पत्र मैं
केशवजी के पास रख देता था । मेरे गोपनीय पत्रादि भी केशवजी के नाम पर
आते थे । केशवजी का ग्रुप बनवारीलाल का ग्रुप और नरेन्द्रनाथ बनर्जी उर्फ नोदू
का ग्रुप अलग-अलग बढ रहे थे । ये सब ग्रुप एक-दूसरे को नही जानते थे ।
बनारस के ग्रुप इलाहाबाद के ग्रुप को नही जानते थे। इलाहाबाद के ग्रुप अलीगढ
या फतेहगढ के ग्रुप को नही जानते थे । इस प्रक र से जितने ग्रुप तैयार होते
जाते थे वे सब एक-दूसरे को नही जानते थे । यह मै पहले ही बता चुका हूँ कि
बनवारीलाल की सहायता से रायबरेली और प्रतापगढ मे इन लोगो का दल बनने
लग गया था । इस बीच मे सन् 1922 के अन्त मे गया मे काग्रेस का अधिवेशन
हुआ । इस अधिवेशन के समय 'बन्दी जीवन' प्रथम भाग की दो-तीन सौ कापियाँ
छापाखाने से निकल चुकी थी । उन प्रतियो को लेकर कलकत्ता होते हुए मै
गया पहुँचा । गया मे पजाब से आये हुए व्यक्तियो से बातचीत की । कालेपानी
से लौटे हुए कुछ सिख मुक्त-राजबन्दियो से मुलाकात की । उसमे भाई प्यारासिंह
भी एक थे । भाई प्यारासिंह बहुत प्रेम से आकर मेरे गले लग गए । सुख-दुःख की
बहुत बातें हुईं फिर काम की बाते हुई । मैने ऐसा अनुभव किया कि सम्भव है
प्यारासिंह अब आगे नही बढ़ेंगे । गया मे मुझे एक बात यह भी मालूम हुई कि
बम्बई से श्री एस० डागे आये हुए है और बंगाल के विभिन्न क्रान्तिकारी दलो
के नेताओ से बातचीत कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश मेरे साथ उनकी मुलाकात नही
हुई । इसी बीच मे श्री प्रतुल गागुली से मेरी फिर बातचीत हुई थी । बनारस के
श्री सतीशचन्द्रसिंह के बारे मे बातचीत छिड़ने पर मैने यह कहा था कि बनारस
मे जैसे उपयुक्त व्यक्ति की आवश्यकता है। श्री सतीशचन्द्र उस श्रेणी के नही
हैं । बहुत सम्भव है कि मेरे ही कहने पर सतीशचन्द्र को बनारस से वापस बुला
लिया गया और उनकी जगह पर श्री योगेशचन्द्र चटर्जी बनारस आए । अब
सोलह साल की सब बाते अच्छी तरह याद नही हैं । मुझे इतना अवश्य याद है
कि गया मे मैंने श्री सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य, सरदार प्यारासिंह, पंजाब के कुछ और
व्यक्ति जिनका नाम मैं आज भी लेना नही चाहता क्योकि वे आज भी गिरफ्तार