बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
पृष्ठ 249, कुल 408 में से
संदर्भ में पढ़ेंजमशेदपुर में मजदूर संगठन / 247
फैलाने से ही काम बनता है। इसके लिए तो बहुत ही श्रृंखलाबद्ध संगठन की
आवश्यकता है। यह संगठन कौन करेगा और कब करेगा ? इन सब कारणों से
जिस समय महात्माजी का सत्याग्रह आन्दोलन जोरों पर चल रहा था, उस समय
जमशेदपुर में मजदूर संगठन का काम करना ही मैंने उचित समझा ।
जब महात्माजी का बारदोली कार्यक्रम स्थगित हो गया और महात्माजी
गिरफ्तार हो गए तो सत्याग्रह आन्दोलन का प्रथम अध्याय समाप्त हो गया और
देश के सामने दूसरा कोई कार्यक्रम नही रहा।
महात्माजी के गिरफ्तार होने के पहले ही मैंने चाहा कि जमशेदपुर के मजदूर
संगठन के काम से छुट्टी ले लूं और विप्लव का कार्य आरम्भ कर दूं। इसके लिए
मैने दो बार जमशेदपुर के मजदूर-सगठन के कार्यकर्त्ताओं के पास त्यागपत्र भेज
दिया, लेकिन उन कार्यकर्त्ताओं ने मेरा त्यागपत्र स्वीकार नही किया। वे लोग नहीं
चाहते थे कि मैं मजदूर-सगठन के कार्य से अलग हो जाऊँ । जब तक महात्माजी
गिरफ्तार नही हुए, तब तक मैंने भी मजदूर-सगठन के कार्य को छोड़ने की ज़िद
नही की। महात्माजी की गिरफ्तारी के बाद मैंने ठान लिया कि अब समय नष्ट
नही करना चाहिए और विप्लव के कार्य को हाथ मे उठा लेना चाहिए।
मजदूर संगठन का कार्य भी नितान्त आवश्यक काम है, यह मैं समझ रहा था ।
लेकिन सशस्त्र विप्लव के लिए भी संगठन का कार्य करना मजदूर संगठन के
कार्य से अधिक महत्त्वपूर्ण है, ऐसा भी मैं समझ रहा था। मैंने यह समझ लिया
कि मजदूर-आन्दोलन तो देशव्यापी विराट् सशस्त्र विप्लव आन्दोलन की एक
शाखा मात्र बन सकता है नही तो केवल मजदूर संगठन के कार्य से हम देश को
स्वाधीन नही कर सकते ।
बंगाल की राजनीतिक परिस्थिति को देखते हुए मैंने यह विश्वास कर लिया
था कि मुझे अकेला ही उत्तर भारत मे अर्थात् पंजाब और युक्त प्रान्त में काम
करना पड़ेगा। ऐसी परिस्थिति में मैंने तृतीय बार जमशेदपुर की मजदूर सभा
की कार्यकारिणी समिति के पास अपना त्यागपत्र भेजा और अबकी बार मैने
ज़िद की कि मेरा त्यागपत्र स्वीकार कर लिया जाय, क्योकि मुझे अब युक्त प्रान्त
मे जाना ही पड़ेगा । मेरी ज़िद के कारण अबकी बार मजदूर सभा की कार्य-
कारिणी समिति ने मेरा त्यागपत्र स्वीकार कर लिया। मैं जमशेदपुर छोड़कर
इलाहाबाद चला आया । उस दिन से यथार्थ रूप में मैंने उत्तर भारत मे विप्लव
कार्य प्रारम्भ कर दिया और जीवन का एक नया अध्याय पुनः प्रारम्भ हो गया ।