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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 237, कुल 408 में से

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पृष्ठ 237

चेम्सफोर्ड सुधार और असहयोग / 235
क्रान्तिकारी दल के प्रति है। और कभी-कभी तो क्रान्तिकारियों को फांसी होने
के अवसर पर खुले आन्दोलन के ये नेता इस प्रकार से समवेदना के साथ वीरत्व
की मर्यादा को अक्षुण्ण रखते हुए ऐसी ही आलोचना करते थे जिसके परिणामतः
क्रान्तिकारी भावना को प्रोत्साहन ही मिलता था।
भारत के दूसरे प्रान्तों में अभी तक खुला राजनीतिक आन्दोलन कहने लायक
कुछ भी नहीं हुआ था। सम्भवतः स्वर्गीय लाजपतराय के कारण पंजाब प्रान्त
बंगाल को छोड़कर भारत के अन्य प्रान्तों से अधिक जागृत था। इसलिए हम
देखते हैं कि पंजाब और बंगाल में क्रान्तिकारी आन्दोलन जैसा पनपा ऐसा और
किसी प्रान्त में नहीं पनपा। बम्बई प्रान्त में राजनीतिक जागरण यथेष्ठ था।
लेकिन लोकमान्य तिलक के बाद बम्बई प्रान्त में किसी उपयुक्त नेता का आविर्भाव
नहीं हुआ। लोकमान्य तिलक छः साल तक मण्डला में कैद रहे। इस बीच महा-
राष्ट्र और गुजरात ने भारत के राजनीतिक आन्दोलन में विशेष महत्त्वपूर्ण भाग
नहीं लिया। उद्योग-धन्धों की उन्नति बम्बई प्रान्त में जैसी थी ऐसी और किसी
प्रान्त में नहीं थी। लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में महाराष्ट्र भारत के दूसरे प्रान्तों
से पीछे नहीं था। लेकिन तिलक के बाद उपयुक्त नेता न रहने के कारण महाराष्ट्र
एवं गुजरात की अग्रगति रुक-सी गई। युक्त प्रान्त में अभी पं० जवाहरलालजी
का अभ्युदय नहीं हुआ था। बिहार में अभी तक न कोई राजनीतिक आन्दोलन ही
हुआ था और न किसी प्रभावशाली नेता का ही आविर्भाव हुआ था। सम्भवतः
बिहार प्रान्त भारत में सबसे पिछड़ा हुआ प्रान्त था। मद्रास प्रान्त की हालत भी
बिहार से कुछ अधिक अच्छी न थी।
लेकिन जब से महात्माजी राजनीतिक क्षेत्र में अवतीर्ण हुए, भारत की
हालत एकदम पलट गई। अभी तक राजनीतिक और क्रान्तिकारी आन्दोलन के
कारण भारत में थोड़ी-बहुत जागृति हो चुकी थी। अण्डमन जाने के पहले युक्त
प्रान्त के शहर के आस-पास के देहातों में भी श्री अरविन्द का नाम मैंने सुना था।
बम पार्टी के नाम से भारत के क्रान्तिकारी आन्दोलन का परिचय जन साधारण
को प्राप्त हो चुका था।
इसके अतिरिक्त यूरोपियन महायुद्ध के कारण भी संसार-भर की हवा पलट
गई थी। भारत में भी आम जनता में इसका असर पहुँचा। इस अभूतपूर्व परि-
वर्तन का परिचय तब मिला जब महात्मा गांधी अपने कार्यक्रम को लेकर भारत
के राजनीतिक क्षेत्र में कूद पड़े।
महात्मा गांधी भारत के क्रान्तिकारियों के प्रति विशेष रूप से आकृष्ट हुए
थे। इनके त्याग और इनके साहस से महात्मा जी समझ गए थे कि ऐसे ही त्याग
और साहस के साथ यदि भारत के राजनीतिक नेतागण कार्यक्षेत्र में अवतीर्ण न
हुए तो उनके काम का असर प्रजा या सरकार पर कुछ भी नहीं पड़ेगा। क्रान्ति-
कारी आन्दोलन को दबाने के लिए रोलट कमेटी की एक भीषण योजना प्रकाशित
हो चुकी थी। महात्मा गांधी ने इस आयोजना के विरुद्ध तीव्र रूप से आन्दोलन