सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 226, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 226

224 / बन्दी जीवन
मैनपुरी केस के कुछ फरार व्यक्तियों के छुटकारे के लिए भी सैण्ड्स साहब
ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। उन्होंने सबसे कहला दिया कि फरार व्यक्ति
आत्म-समर्पण कर दें हम उन्हें छुड़वाने का प्रबन्ध कर देंगे। इस प्रकार से मैनपुरी
के क़रीब-क़रीब सब कैदी कुछ शर्तों पर छोड़ दिए गए। लेकिन एक व्यक्ति पं०
देवनारायणजी सैण्ड्स साहब से तो मिले लेकिन उन्होंने कोई शर्त कबूल नहीं की।
तब सैण्ड्स साहब ने कहा कि मैं आपको गिरफ्तार नहीं करूँगा, क्योंकि आप
अपनी खुशी से मेरे पास आए हैं। हम लोगों ने आपको नहीं ढूँढ़ा था। आपकी
जहाँ खुशी हो, चले जा सकते हैं। मैं आपको चले जाने का काफ़ी मौक़ा दूंगा।
लेकिन मेरी सलाह है कि आप हमारी शर्तों को मान लें।
आखिर में यह तय हुआ था कि पं० देवनारायणजी अपने स्थान पर जाकर
रहेंगे; पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी; और इस बीच में सैण्ड्स साहब अपने
ऊपरवालों से यह तय करेंगे कि पं० देवनारायणजी को बिना शर्त छोड़ दिया जा
सकता है या नहीं; नहीं तो उन्हें भाग जाने का काफ़ी मौक़ा दिया जाएगा। ऐसी
सूरत में देवनारायणजी ने सैण्ड्स साहब से एक चिट्ठी ले ली थी जिसमें यह
हिदायत थी कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार न करे। इसके बाद न तो उन्हें किसी ने
गिरफ्तार ही किया और न उन्हें कोई हुक्म ही मिला। आधुनिक भारत के
इतिहास में इस प्रकार का शायद यही एक ऐसा दृष्टान्त है और सम्भवतः सैण्ड्स
साहब को छोड़कर आज तक ऐसा व्यवहार और किसी ने नही किया। लेकिन यह
भी बात सच है कि असहयोग आन्दोलन के सिलसिले में चौरी-चौरा में पुलिस
की तरफ से जो बीभत्स काण्ड हुआ था वह भी सैण्ड्स साहब के ही हुक्म से हुआ
था लेकिन चौरी-चौरा के मामले में प्रजा की तरफ से भी पुलिस के ऊपर जो
कुछ हुआ था उसी के कारण पुलिसवाले उत्तेजित हो गए थे और इस उत्तेजना
के आवेश में दोनों ही तरफ से ज्यादतियां हुईं।
खैर, कुछ भी हुआ हो, अण्डमन से लौटने के बाद एक दफा मुझे सैण्ड्स साहब
से मिलने जाना ही था। गोरखपुर में आने के बाद जाँच करने पर मालूम हुआ
कि सैण्ड्स साहब खुफिया विभाग से अलग होकर साधारण विभाग में डिप्टी
इंस्पेक्टर जनरल के पद पर हैं और इस समय फैज़ाबाद में हैं। फैज़ाबाद में मेरे
एक बड़े पुराने मित्र आचार्य नरेन्द्रदेव भी रहते थे। सैण्ड्स साहब से मिलने का
मैंने यही अच्छा अवसर समझा। सैण्ड्स साहब से मिलने के बहाने नरेन्द्रदेवजी
से भी मिल लूंगा।
मैं फैज़ाबाद चला गया और सैण्ड्स साहब से मिला। मुझे क़रीब दस मिनट
तक एक कमरे में ठहरना पड़ा। बगल के कमरे में सैण्ड्स साहब एक डकैती के
मामले की तहकीकात कर रहे थे। इतनी शान्तिपूर्वक बातचीत हो रही थी कि
किसी को यह पता भी नहीं चल सकता था कि कमरे में कोई है भी। जब सैण्ड्स
साहब हमसे मिले तो बड़ी भद्रतापूर्वक शिष्टाचार के साथ हाथ-मे-हाथ मिलाकर
मुझे अपने पास बैठाया और कहा कि रस्सी को एक तरफ आप लोग खींच रहे थे