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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 225, कुल 408 में से

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पृष्ठ 225

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मि० सैण्ड्स और बैरिस्टर चटर्जी
बनारस षड्यन्त्र के मामले में हम चार भाइयों में से तीन गिरफ्तार हो चुके
थे । मेरे तीसरे भाई जितेन्द्र को दो साल की सजा भी हो गई थी । मेरे मझले
भाई रवीन्द्रनाथ अदालत से तो बरी कर दिये गए थे, लेकिन बाद को गोरखपुर
में अपने मकान में नज़रबन्द कर दिये गए । जितने दिनों के बाद में अण्डमन से
लौटकर आया उतने दिनों में जितेन्द्र ने एन्ट्रेंस और इण्टरमीडिएट पास करके
बी० ए० में पढ़ना शुरू कर दिया । रवीन्द्रनाथ बी० ए० में पढ़ने के लिए जाने
वाले थे या चले गए थे, यह मुझे ठीक-ठीक याद नहीं । अण्डमन जाने के पहले
मैं बी० एस-सी० के प्रथम वर्ष में पढ़ रहा था । अब छूटने के बाद मैंने भी चाहा
कि बी० ए० पाम कर लूं । मेरे भाई और माताजी की इच्छा न थी कि मैं
बी० ए० पढ़ूँ । लेकिन मेरे अत्यन्त आग्रह करने पर वे राजी हो गए । मन में यह था
कि कॉलेज में पढ़ने से मुझे नौजवानों से मिलने का प्रचुर अवसर मिलेगा । कुछ यह
भी इच्छा थी कि बी० ए० की डिग्री ले लूं शायद भविष्य में कुछ काम आए ।
इलाहाबाद जाने के पहले मेरे एक आत्मीय के पास जो कि रिश्ते में मेरे मामू
लगते थे, डिप्टी इन्स्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस सैण्ड्स साहब के पास से एक चिट्ठी
आई थी, जिसमें लिखा था कि शचीन्द्र को कालेपानी से लौटने पर अवश्य मेरे
पास एक दिन भेज दें ।
यहाँ पर सैण्ड्स साहब के बारे मे दो शब्द कह देना नितान्त आवश्यक है ।
आप ही के तत्वावधान में बनारम षड्यन्त्र केस चला था । मैनपुरी षड्यन्त्र केस
भी आप ही के जिम्मे था । मुझे सजा हो जाने के बाद माताजी ने सरकार के पास
माफ़ी का एक आवेदन-पत्र भेज दिया था; लेकिन सरकार की तरफ से यह जवाब
मिला था कि अभी छोड़ा नही जा सकता । इसके बाद जब सन् 1919 के
दिसम्बर महीने में सम्राट् के मुंह से राजबन्दियों को छोड़ने की घोषणा हुई तो
सैण्ड्स साहब ने कलकत्ता के प्रसिद्ध बैरिस्टर बी० सी० चटर्जी साहब से यह
कहा कि अब शचीन्द्र की माता से माफ़ी का आवेदनपत्र देने के लिए कह दीजिए,
मैं उमके लिए सिफारिश कर दूंगा । बी० सी० चटर्जी उस समय मैनपुरी केस
की अपील की पैरवी के लिए आये हुए थे। मेरे छूटने की कहानी दूसरे स्थान पर
बतलाई जा चुकी है ।