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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 408 में से

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पृष्ठ 212

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मातृभूमि की गोद में
हम उम्मीद किए थे कि शाम से पहले ही कलकत्ता पहुँच जाएंगे। लेकिन
कलकत्ता पहुँचने में संध्या बीत गई। अभी भी दुःख का अन्त न हुआ था। जहाज़ से
उतरते-उतरते एक घंटा से भी अधिक समय लग गया। उतरने के बाद फिर वही
जोड़े-जोड़े खड़े कर दिये गए। और फिर दो-तीन मील दूर एक थाने में पैदल
जाना पड़ा। अण्डमन जाते वक्त भी इसी तरह सुबह प्रेजीडेन्सी जेल से जहाज़
तक जोड़े-जोड़े बेड़ियां पहने मार्च करके आना पड़ा था। टाल्स्टाय के रिसरेक्शन
ग्रन्थ में क़ैदियों के दल का पैदल सफर करने का एक ऐसा ही हृदय-विदारक दृश्य
आया है। आज छूटने के दिन भी फिर जहाज़ से थाने की तरफ जोड़े-जोड़े से
जाना पड़ा। उधर सौभाग्य से वारीन्द्र, उपेन्द्र और हेमचन्द्र अर्थात् भारत के
सर्वप्रथम बम केस के राजबन्दियों से मिलने के लिए सी० आई० डी० के अफ़सर
आये हुए थे। उन्होंने इन्हें सीधे घर जाने की अनुमति दे दी। हमेशा की तरह मेरे
दुर्भाग्य ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। मटिया बुर्ज के थाने के विशाल प्रांगण में हम
सब मुक्त क़ैदी एकत्र किए गए। अब फिर शक होने लगा कि हम सचमुच मुक्त
हुए हैं या नहीं। लेकिन किसी ने कोई रोक-टोक नही की। इससे हमने अनुमान
किया कि यह सब मामूली अनुशासन की कार्रवाई है। थाने के बाहर बढ़े तो किसी
ने रोका नहीं। आगे और बढ़े, इस तरह से बढ़ते-बढ़ते थोड़ी दूर तक और चले
गए, सोचा अब कुछ खाएँ। पुलिस की तरफ से कोई व्यवस्था दिखलाई नही दी ।
वारीन्द्र ने मुझे तीन रुपये दिए थे, उसी में से कुछ खर्च करके खाया-पिया ।
कलकत्ता के पास जाकर भी कलकत्ता में नहीं जाने पाए । खाने के लिए बहुत रद्दी
चीज़ मिली । मन में लग रहा था कि दौड़कर कलकत्ता चले जाएँ । लेकिन फिर
डर यह हो रहा था कि कही आसमान से गिरकर खजूर पर न अटक जाएँ । रात
तो किसी सूरत से बिताई । मालूम हुआ दूसरे दिन लाल दिग्घी थाने में जाकर
रेलवे इत्यादि का खर्च मिलेगा तब कही जाकर पुलिस के पंजे से ठीक-ठीक छुटकारा
मिलेगा ।
प्रातःकाल होते ही बहुवांछित जनकोलाहलपूर्ण भारतवर्ष की राजधानी
महानगरी कलकत्ता में प्रवेश करने की प्रबल इच्छा हुई। पूछताछ करने पर मालूम
हुआ कि मिटियाबुर्ज के थाने से लालदिग्घी थाने में जाना पड़ेगा। अभी जाने में