बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका / 19-
एवं रूस जैसे पिछड़े हुए देशों में अपना राज्य क़ायम करने में बहुत कुछ कृतकार्य
हुए हैं। इसके मूल में आर्थिक कारण उतने नहीं हैं जितने अन्य और अनेक
प्रकार के कारण हैं।
इन सब बातों की वैज्ञानिक प्रणाली से आलोचना करना आवश्यक है, लेकिन
इस भूमिका में यह सम्भव नही है। इन सब बातों की सम्यक् आलोचना कहीं
अन्यत्र करने की मेरी प्रबल इच्छा है।
आधुनिक विज्ञान एवं ऐतिहासिक खोज की प्रणाली की सहायता से भारतीय
विप्लव आन्दोलन का एक प्रामाणिक इतिहास अलग ही लिखने की प्रबल
आकांक्षा है, इसलिए प्रस्तुत पुस्तक 'बन्दी जीवन' में कोई विशेष परिवर्तन नहीं
किया गया। इस पुस्तक की हिन्दी भी मेरी नही है। इस बार जेल से छूटने
के बाद से हिन्दी में लिखना आरम्भ किया है। इच्छा है कि अगले सस्करण में
अनुवाद की सहायता न लेकर मैं हिन्दी में ही मूल ग्रन्थ को लिखूं। इस ग्रन्थ की
त्रुटियो के लिए पाठकवर्ग से क्षमा का भिखारी हूँ।
लखनऊ,
13 सितम्बर, 1938
- शचीन्द्रनाथ सान्याल