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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 408 में से

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पृष्ठ 205

कालेपानी से विदाई / 203
इनके दल में शामिल होने से बहुत पुष्ट हो गया था। मुक़दमे के दौरान में बयान
देते समय उल्लासकर ने यह कहकर गौरव अनुभव किया था कि 'अमुक बम ने
अमुक स्थान पर जो भैरव-लीला दिखाई थी, वह मेरे ही हाथ का बना हुआ था।'
एक अदालत के कमरे में एक राष्ट्रीय संगीत गाकर उल्लासकर ने सबको मुग्ध
कर दिया था। प्रसिद्ध राष्ट्रीय नेता स्व० विपिनचन्द्र की एक कन्या के साथ
उनका प्रणय हो गया था और विवाह की बात स्थिर हो चुकी थी, परन्तु इस
बीच में अलीपुर षड्यन्त्र के मामले में उल्लासकर गिरफ़्तार हो गए और उन्हें
सज़ा हो गई। विपिनपाल की लड़की ने आज तक शादी नहीं की। जब तक
उल्लासकर जेल में थे तब तक तो कोई बात ही नहीं थी। जेल में उल्लासकर का
मस्तिष्क विकृत हो गया है, यह जानकर तब उसने शादी न करना ही उचित
समझा। जहाँ तक मुझे मालूम है, उस लड़की ने फिर शादी नहीं की।
अण्डमन के जेल में रहते हुए उल्लासकर एक दिन कहने लगे कि आखिर
क्यों मैं जेल की मशक्कत करूँ। एक बागी के लिए जेल में भी बगावत का रास्ता
अख्तियार करना ही मुनासिब और इज्जत का रास्ता है। इस तरह से जेल में
कई बार क़ानून तोड़कर उल्लासकर ने तरह-तरह की सजायें पाईं। एक दफ़े
जेल के बाहर कड़ी धूप में ईंट की भट्ठी में काम करते समय पहले की तरह काम
करने से इनकार कर दिया। उल्लासकर और उनके कुछ साथियों को जेल में ले
आया गया और तनहा कोठरी में दीवाल में लगे हुए लोहे के छल्ले से हथकड़ी में
बाँधकर इन्हें खड़ा कर दिया गया। इसे जेल मे खड़ी हथकड़ी कहा करते हैं। क़ानूनन
यह एक दिन में आठ घण्टे तक ही लगाई जाती है एवं लगातार सात दिन से
अधिक ऐसी खड़ी हथकड़ी लगाने का हुक्म नही है। लेकिन जेल के अधिकारी-
गण जब किसी क़ैदी को सताना चाहते है तो इन सब क़ानूनों की पाबन्दी नही
की जाती। दफ़्तर के कागज़ात मे कार्रवाई क़ानून के हिसाब से सही तौर से
रखी जाती है, लेकिन अमल में कुछ और ही होता है। अगर कोई क़ैदी अदालत
के सामने यह सब बातें साबित करना चाहे तो यह गैरमुमकिन-सी बात है,
क्योकि जेल के अधिकारियो के खिलाफ कोई गवाह नही मिल सकता। खैर, जो
कुछ हो, उल्लासकर को खड़ी हथकड़ी की हालत मे ही एक सौ तीन या एक सौ
चार डिग्री बुखार आ गया। फिर भी वे खड़ी हथकड़ी मे ही रखे गए। इस
हालत मे वे बेहोश हो गये। बेहोशी की हालत मे वे अस्पताल भेजे गए एवं जब
उन्हें होश आया तो देखा गया कि वे पागल हो गए हैं। यही उल्लासकर कहा
करते थे कि भाई अब ऐसे आदमियो के पाले पड़े हैं कि ये हाड खाएँगे, मांस
खाएँगे, चमड़ी से डुगडुगी बजाएँगे। अण्डमन के डिप्टी-कमिश्नर लुइस साहब
उल्लासकर के विषय में बहुत ऊँचे खयाल रखते थे।
जब वारीन्द्र ने आकर लुइस साहब की बातें सुनाई और इस सिलसिले में
उल्लासकर का जिक्र आया तो मुझे उल्लासकर के बारे मे ऊपर लिखी बातें
मालूम हुईं। ये सब बातें सुनकर पिछले दिनों के वे नज़ारे आँखों के सामने घूमने