बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
पृष्ठ 19, कुल 408 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका / 17
नौजवान उससे अभिभूत हो रहे हैं। भौतिकवादियों के मन में यह भी एक धारणा
है कि आधुनिक विज्ञान ने आत्मवाद के सिद्धान्त को जड़ से उखाड़कर फेंक दिया
है, लेकिन ये सब बातें बिलकुल निराधार हैं।
निष्पक्षपात रूप से यदि हम आधुनिक विज्ञान की आलोचना करें तो हमें यह
अवश्य ही स्वीकार करना पड़ेगा कि विज्ञान केवल इन्द्रियग्राह्य विषयों की ही
खोज करता है, इस कारण विज्ञान की सहायता से हम यह कैसे कह सकते हैं कि
इन्द्रियातीत वस्तुओं का अस्तित्व ही नहीं है ? यन्त्रों के आविष्कार से हम अपनी
इन्द्रियों की शक्ति को बढ़ाते हैं, और तब हम देख पाते हैं कि जो वस्तु इन्द्रिय-
गोचर नहीं थी वह यन्त्रों की सहायता से इन्द्रियग्राह्य हो गई । आज वैज्ञानिक
उन्नति के कारण हमें यह प्रतीत होने लगा है कि हमारे सुपरिचित ज्योति-पुंज के
अतिरिक्त, हमारी इन्द्रियग्राह्य आलोक-रश्मियों के अलावा भी, ऐसी बहुत-सी
किरणें हैं, जिनकी प्रकाश-शक्ति परिचित आलोक-रश्मि से कहीं अधिक एवं
आश्चर्यप्रद है । यन्त्रों की और भी उन्नति होने पर हमें पता चलेगा कि हमारे
परिचित जगत् से, हमारे इन्द्रियग्राह्य जगत् से, इन्द्रियातीत जगत् कहीं अधिक
व्यापक एवं चमत्कारपूर्ण है । हम मनुष्यों का स्थान उस अज्ञातलोक एवं ज्ञात
लोक के सन्धि-स्थल पर स्थित है । यन्त्रों की सहायता के बिना भी मनुष्य ऐसी
शक्ति अर्जन कर सकता है, जिसकी सहायता से, इन्द्रियातीत जगत् का उसे
परिचय मिल सकता है ।
जीवविज्ञान एवं मनोविज्ञान की आधुनिक उन्नति से वैज्ञानिकों को यह प्रतीत
होने लगा है कि भौतिक मतवाद एक अंधविश्वास मात्र है । इसका वैज्ञानिक
आधार कुछ भी नहीं है। प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक जे० एम० हालडेन साहब ने तो
यहाँ तक कह दिया है कि यदि व्यक्तिगत रूप से उन वैज्ञानिकों के प्रति लोगों की
असीम श्रद्धा नहीं होती तो भौतिकवाद के मानने के कारण उन्हें वे घृणा की दृष्टि
से देखते । देखिये [Materialism by J. S. Haldane C. H., M. D., F.
R. S. Hom. LL. D. (Birmingham and Edinburgh) Hon. D.
Sc. (Cambridge, Leeds, and Witwaterarsand) Fellow of New
College, Oxford, and Honorary Professor Birmingham Unive-
rsity—p. 39] नोबेल पुरस्कार प्राप्त किये हुए डाक्टर कॅरेल अमेरिका के
प्रसिद्ध रॉकफेलर इंस्टिट्यूट में अनुसन्धानकारी, जगत्प्रसिद्ध जीव-विज्ञानवेत्ता
हैं । इनकी भी राय में भौतिकवाद एक व्यक्तिगत विश्वासमात्र है । विज्ञान की
दृष्टि से इसकी पुष्टि नहीं हो सकती । बल्कि विज्ञान की आधुनिक गति भौतिक-
वाद के विरोध में जा रही है। (देखिए कैरेल के लिखित Man the Unkn-
own) इस प्रकार से आधुनिक जगत् के विख्यात एवं लब्धप्रतिष्ठ वैज्ञानिकों
के वचन उद्धृत करके यह दिखलाया जा सकता है कि भौतिकवाद एक मत मात्र
है। भौतिकवाद का सिद्धान्त वैज्ञानिक आधार पर प्रतिष्ठित नहीं है । बट्रेण्ड
रसेल साहब ने भी यह कहा है कि रूस के राजनीतिज्ञों एवं अमेरिका के कुछ