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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 408 में से

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पृष्ठ 179

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विप्लव का प्रयास व्यर्थ क्यों हुश्रा ?
भारतीय विप्लवियों के सभी प्रयास क्यो व्यर्थ हुए। यह जानने के लिए
पहले यह समझ लेना होगा कि वे चाहते क्या थे ? उनका उद्देश्य भली भाँति
समझे बिना यह जानना भी कठिन होगा कि वे कहाँ तक विफल हुए कहाँ तक
नही, और उनकी इस विफलता का कारण क्या था । इसीलिए उनकी इस
व्यर्थता का कारण खोजने से पहले उनका उद्देश्य क्या था इस विषय की कुछ
आलोचना करना आवश्यक है ।
भारतीय विप्लववादियो का उद्देश्य क्या था, इस विषय पर कहने को इतनी
बातें हैं कि यहाँ पर उनकी पूरी आलोचना सम्भव नही है, कारण कि यह आलो-
चना करने के लिए भारत के राष्ट्रक्षेत्र मे इस विप्लव के आविर्भाव से आरम्भ
कर उनकी क्रमिक परिणति के इतिहास की भी आलोचना करना आवश्यक हो
जाता है, और इस प्रकार यह आलोचना इतनी बड़ी हो जाएगी कि हम आलोच्य
विषय से बहुत दूर जा पड़ेंगे । इसीलिए इन सब आलोचनाओं को किसी और
समय करने की इच्छा है। इस समय केवल अपना विषय समझाने के लिए जितनी
आलोचना आवश्यक प्रतीत होती है, उतनी ही करूँगा।
भारतीय विप्लव दल के बीच चाहे कितने ही मतभेद क्यो न रहे हों, परन्तु
इस विषय मे सभी सम्पूर्णतः एकमत थे कि भारत को अक्षुण्ण स्वाधीनता प्राप्त
करनी ही होगी, अर्थात् भारत-भिन्न कोई भी जाति भारत के भले-बुरे की
विचारकर्त्ता होकर भारत के मगल के लिए भारत के किसी भी काम मे हस्तक्षेप
न कर सके—भारत के लिए किस प्रकार की शासन-प्रणाली सबसे अधिक मंगल-
कारी होगी इस विषय के विचारकर्त्ता और परिचालक भारतवासी ही हों ।
भारत का सामाजिक आदर्श क्या होगा, भारत मे सामाजिक समस्या का समाधान
किस प्रकार करना सबसे अधिक मगलजनक होगा, भारतेतर राष्ट्रों के साथ
भारत किस प्रकार का सम्बन्ध-सूत्र स्थापित करेगा, भारत के व्यवसाय-वाणिज्य
को किस प्रकार परिचालित करने से भारत का और जगत् का मगल होगा, इन
सब बातो को भारतवासी ही जैसा ठीक समझें वैसा ही हो, और किसी भी