बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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परिणाम
विप्लवियों की सभी चेष्टाएँ बार-बार व्यर्थ हुईं, उसका फल यह हुआ कि
स्वदेश में और विदेश में भिन्न-भिन्न राजशक्तियों की चक्की मे पिसते हुए उनकी
लांछनाओं की सीमा न रही । स्वदेश की तो बात ही नही, विदेश में भी वे एक
देश से दूसरे देश को मारे-मारे फिरने लगे और स्वदेश में ‘भारत रक्षा आईन’ के
नीचे ज़रा-सा सन्देह होते ही दल-के-दल युवकों को जेलों में या गाँवों की नज़र-
बन्दी में ठेल दिया जाता । जिनके विरुद्ध तनिक-सा भी प्रमाण पाया गया, उन्हें
अंग्रेज़ सरकार के हाथ कठोर दण्ड भोगना पड़ा । अनेकों ने फाँसी के तख्ते पर
जीवन दिया, बहुतों को कालापानी हुआ । पुलिस का उत्पात या जेल की कठोरता
न सह सकने पर कई युवकों ने आत्महत्या का आश्रय लिया, इन सब करुण-
कथाओं ने कितने ही तरुण युवकों की माताओं के दिल निष्ठुरता से टुकड़े-टुकड़े
कर डाले । विप्लव दल प्रायः छिन्न-भिन्न हो गया । विप्लवियों के नेता या तो
जेल मे डाले गए, या फाँसी के तख्ते पर चढ़े । विप्लव दल जब इस प्रकार छिन्न-
भिन्न होकर देश के चारों ओर बिखर गया तब अनेक स्थानों पर पुलिस के साथ
उनके जो सब सघर्ष हुए, विप्लव युग के इतिहास में वे स्मरणीय रहेंगे ।
पजाब के विप्लवान्दोलन की गम्भीरता और व्यापकता जब प्रकट हो गई,
तब गवर्नमेंट जान गई कि इस विप्लव दल की अब किसी प्रकार अवहेलना करने
से काम न चलेगा । भारत के प्रवीण, विज्ञ और राजनीति-विशारद नेता लोग
बहुत समय से यह बात कहते आते थे कि भारत का यह विप्लव प्रयास बिलकुल
लड़कपन है, किन्तु अंग्रेज़ गवर्नमेंट यह बात अच्छी तरह जान गई थी कि इन
विप्लवियों को यदि कुछ दिन भी निर्विघ्न रूप से अपने अभीष्ट के अनुसार काम
करने का अवसर और सुयोग मिल जाय तो भारत की अवस्था में सचमुच एक
अभूतपूर्व परिवर्तन हो जायगा । भारतीय विप्लववादियों के लिए क्या-कुछ कर
डालना सम्भव है, इसकी अंग्रेज़ गवर्नमेंट जैसी कल्पना करती थी, भारत के
राजनीतिक नेताओं ने वैसी कल्पना कभी नही की । अण्डमन जाने से पहले कुछ
ऊँचे अंग्रेज़ अधिकारियों के साथ मेरी इस विषय में अनेक बार बातचीत हुआ
करती थी। इनकी बातचीत से मैं समझ पाया था कि गवर्नमेंट भारत के
भिन्न-भिन्न आन्दोलनों में से एकमात्र विप्लवान्दोलन को चिन्ता करने लायक