बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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धिकारी ने फिर भी सोहनलाल से बड़ा अनुरोध किया, अनेक प्रकार समझाया
कि वृथा प्राण देकर कुछ लाभ नहीं होगा। अन्त में सोहनलाल कुछ सोचकर
बोले—"देखो, यदि मुझे बिलकुल छोड़ दो और यदि मैं इच्छानुसार चला जा
सकूँ, तो क्षमा प्रार्थना करने को प्रस्तुत हूँ।" अंग्रेज राज्याधिकारी ने दुःखित होकर
कहा, "वैसा कोई अधिकार उनके हाथ में नहीं है।" सोहनलाल ने कहा, 'तो
और ज़रा भी देर न करो, अपने कर्त्तव्य का पालन करो, और मुझे भी अपना
कर्त्तव्य पूरा करने दो।"
सोहनलाल को फाँसी हो गई।
बर्मा के मुसलमान विप्लववादियों ने फिर बकरीद के समय विप्लव का
आयोजन किया। किन्तु आयोजन पूरा न होने से विप्लव का दिन पच्चीस दिसम्बर
तक हटा दिया गया। बर्मा की मिलिटरी पुलिस की एक बारक में रिवाल्वर,
डाइनामाइट आदि बहुत-सी चीजें पकड़ी गईं और उसके बाद बर्मा के सब सन्देह-
जनक व्यक्तियों को डिफेंस ऑफ़ इंडिया ऐक्ट के अनुसार नज़रबन्द करा दिया
गया। उसके बाद बर्मा में कोई उपद्रव नहीं हुआ है।