बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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ओर उस प्रकार ध्यान दे सकते तो अवश्य ही और तरह का फल होता ।
जो लोग यह सोचते हैं कि संसार की इम्पीरियलिस्टिक (साम्राज्य कामी)
गवर्नमेंटों से भारतीय विप्लववादियों की सहायता पाने की आशा बिलकुल दुराशा
मात्र थी उन्हें जान लेना चाहिए कि ससार की इन साम्राज्यकामी गवर्नमेंटों की
परस्पर शत्रुता के कारण ही चीन अब तक अत्यन्त बुरी अवस्था मे रहने पर भी
एकदम असहाय होकर पराधीनता की जकड़ मे नही आया, अफ़गानिस्तान,
फारिस, तुर्की आदि देश भी इसी प्रकार विभिन्न राजशक्तियों की सहानुभूति और
सहायता पाकर ही क्रमशः एक-एक शक्तिशाली जाति के रूप मे परिणत होते
जाते हैं, पिछले बोअर युद्ध के समय जर्मनी ने बोअरों की अस्त्र-शस्त्र द्वारा कम
सहायता नही की और अभी पिछले युद्ध के कारण तुर्की की दशा तो एकदम
निढाल हो गई है, कमालपाशा ने तो उस समय एक प्रकार से तुर्की गवर्नमेंट के
विरुद्ध ही विद्रोह की घोषणा करके मित्र शक्तियो के सन्धि-पत्र को भी निकम्मा
कर दिया किन्तु ऐसा हो सका फ्रांसीसियों की सहायता से और फिर आज भी
एकदम फ्रांसीसियों पर ही बिलकुल निर्भर न रहना पड़े इसीलिए अमेरिका के
साथ अंगोरा की जान-पहचान बनाने की चेष्टा चल रही है।
असल बात यह है कि दुनिया मे यदि कोई माथा ऊँचा करके खड़ा हो सके
तो उसे सहायता का अभाव नही रहता. अन्दर की शक्ति के अभाव से ही सभी
लांछनाएँ होती हैं, अन्दर की दीनता से ही कंगाली होती है, "बाहर से दिया ही
जा सकता है किन्तु लेना होता है अपने गुण से।"