सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 408 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 123

काशी अंचल की कहानी / 121

कहना हो वह कहना।'" दूसरे दिन फिर करतारसिंह ने सब दायित्व अपने ही सिर
पर ले लिया। उनकी शान्त वीरता पर सब मुग्ध हो गये। भारत के इतिहास मे
करतारसिंह का नाम सदा अमर रहेगा। भारत के विप्लव युग को भी करतार-
सिंह ने स्मरणीय कर दिया।
इस षड्यन्त्र के मामले मे लाहौर डी० ए० वी० कालेज के भूतपूर्व अध्यापक
भाई परमानन्द भी पकड़े गए, उन्हे भी अन्त में आजन्म कालेपानी का दण्ड
मिला। लाहौर जेल में रहते समय वे करतारसिंह के पास की कोठरी ही मे बन्द
थे। उस समय प्रायः सभी राजनैतिक अपराधी एक ही बैरक मे बन्द रहते थे।
गत को वे सभी अपनी-अपनी कोठरी से एक-दूसरे के साथ गप-शप करते थे। कहते
है एक दिन भाई परमानन्द ने करतारसिंह से कहा "देखो यदि मालूम होता
कि अन्त मे मुझे भी यही दुर्गति भोगनी होगी तो मै भी तुम्हारे काम मे पूरा उद्यम
से योग देता !" भाई परमानन्द के एक ओर करतारसिंह थे और दूसरी ओर की
कोठरी मे एक और सिक्ख थे। वे अब भी बचे हुए है और इन्ही से मैने उक्त
घटना अण्डमन में सुनी थी।